गहलोत की पॉलिटिकल नियुक्ति को हाईकोर्ट ने किया बहाल, वीडियो में देखें भूदान यज्ञ बोर्ड भंग कर दिया था
राजस्थान हाईकोर्ट ने भूदान यज्ञ बोर्ड को भंग करने के सरकार के फैसले पर सोमवार को रोक लगा दी। जस्टिस सुदेश बंसल की अदालत में बोर्ड अध्यक्ष लक्ष्मण कड़वासरा और अन्य सदस्यों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया।
क्या है मामला?
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साल 2022 में गहलोत सरकार ने राजस्थान भूदान यज्ञ बोर्ड का गठन किया था और इसमें अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की थी।
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लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद भजनलाल शर्मा सरकार ने 18 जून 2024 को इस बोर्ड को भंग करने का आदेश जारी कर दिया।
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इस फैसले के खिलाफ लक्ष्मण कड़वासरा और अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट का आदेश
याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी। अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए जवाब मांगा है।
क्या कहते हैं याचिकाकर्ता?
लक्ष्मण कड़वासरा और अन्य सदस्यों का कहना है कि बोर्ड का कार्यकाल अभी बाकी था और सरकार ने अचानक इसे भंग कर दिया, जो कि नियमों के खिलाफ है। उन्होंने हाईकोर्ट से सरकार के आदेश को निरस्त करने की मांग की।
भूदान यज्ञ बोर्ड की भूमिका
भूदान यज्ञ बोर्ड का गठन भूमिहीन किसानों और जरूरतमंदों को भूमि वितरण से जुड़े मामलों को हल करने के लिए किया गया था। इस बोर्ड के भंग होने से राज्य में कई भूमि विवादों के लंबित होने की आशंका थी।
सरकार का पक्ष
भजनलाल सरकार का तर्क है कि भूदान यज्ञ बोर्ड की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा की जा रही थी और इसे सुधारने के लिए कुछ बदलाव जरूरी थे। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार को अब इस फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
क्या होगा आगे?
अब इस मामले में राज्य सरकार को हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा। तब तक के लिए भूदान यज्ञ बोर्ड पूर्व की तरह काम करता रहेगा। कोर्ट के अगले आदेश पर ही यह तय होगा कि भूदान यज्ञ बोर्ड रहेगा या सरकार इसे भंग करने के लिए नया तरीका अपनाएगी।