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आखिर कैसे चलता है सट्टा बाजार, कैसे फिक्स होते हैं मैच और खिलाड़ी ?
 

 

क्रिकेट न्यूज़ डेस्क। सट्टा बाजार का करोबार काफी बड़ा है और इससे बाकी क्षेत्रों के साथ ही क्रिकेट खेल भी अछूता नहीं रहा है। क्रिकेट मैचों को लेकर काफी ज्यादा सट्टेबाजी होती है और इसके लिए फिक्सिंग भी की जाती है ताकि ज्यादा लाभ कमाया जा सके।

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कैसे चलता है सट्टेबाजी का धंधा
संचार के नए साधों के चलन की वजह से यह धंधा काफी बड़ा हो गया है।सट्टेबाजी का नेटवर्क काफी व्यापक है. कराची, जोहानसबर्ग और लंदन जैसे शहर इसके प्रमुख गढ़ हैं। भारत में जो क्रिकेट की सट्टेबाजी होती है वह अवैध है ।

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इसके रेट दुबई या पाकिस्तान में तय होते हैं ।वहां से रेट की जानकारी भारतीय उपमहाद्वीप के सटोरियों और अन्य जगहों पर धंधे से जुड़े लोगों को पहुंचाई जाती है।ये रेट सबसे पहले मुंबई पहुंचते हैं। फिर वहां से बड़े बुकिज़ और फिर वहां से छोटे बुकिज़ के पास पहुंचते हैं।मानकर चलिए अगर किसी टीम का फेवरेट रेट  80-83 आता है, तो इसका मतलब यह है कि फेवरेट टीम पर 80 लगाने पर एक लाख रुपए मिलेंगे।वहीं हार जाने पर पूरा पैसा डूब जाता है। मैच के दौरान रेट बदलते रहते हैं।

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 कैसे फिक्स होते हैं मैच और खिलाडी
सट्टेबाज ही फिक्सिंग करते हैं। मैच फिक्स करना काफी मुश्किल होता है क्योंकि इसके लिए टीम के कप्तान से लेकर खिलाड़ियों तक से संपर्क करना पड़ता है।ऐसे में फिक्सिंग के लिए खिलाड़ी को सबसे पहले टारगेट किया जाता है।अब तक फिक्सिंग के कई मामले में सामने आ चुके हैं। भारत से लेकर पाकिस्तान तक खिलाड़ी फिक्सिंग में फंसे हैं।