'हमने कंबल से ढके शवों के टुकड़े....' चश्मदीदों ने बयान की प्लेन क्रेश की खौफनाक कहानी, जाने कैसे क्या हुआ ?
महाराष्ट्र के बारामती में हुए प्लेन क्रैश की एक चश्मदीद महिला सामने आई है। मौके पर मौजूद महिला ने हादसे का खौफनाक मंजर बताया। इस हादसे में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। चश्मदीद ने बताया कि बुधवार सुबह प्लेन पहली बार उसके घर के ऊपर से उड़ा था और सब कुछ ठीक लग रहा था। लेकिन जब वह लौटा, तो बहुत नीचे उड़ रहा था। वह रनवे तक नहीं पहुंच पाया और सीधे क्रैश हो गया, जिससे जोरदार धमाका हुआ। महिला ने आगे बताया, "हम अपनी भैंसों के पास थे। धमाका और आग इतनी भयानक थी कि हम पानी की बाल्टियां लेकर भागे। चारों तरफ लाशें बिखरी पड़ी थीं। एक लाश का सिर कटा हुआ था और अलग पड़ा था; वह सिर्फ आधी लाश थी। हम बहुत डर गए थे, लेकिन फिर भी हमने कंबल और कपड़े लेकर बिखरी हुई लाशों को ढका। पुलिस को आने में 15-20 मिनट लगे, और तब तक हम पानी और कपड़ों के साथ वहीं खड़े रहे।"
मैंने अपनी आँखों से देखा…
— Prabhakar Kumar (@prabhakarjourno) January 28, 2026
अजित पवार के विमान हादसे के प्रत्यक्षदर्शी ने कहा
विमान लैंडिंग से ठीक पहले संतुलन खो बैठा, ज़मीन से टकराते ही ज़ोरदार आवाज़ हुई और आग लग गई। कुछ ही पलों में कई धमाके सुनाई दिए।#AjitPawar #PlaneCrash pic.twitter.com/Zatq0KXyCu
अजीत पवार: बारामती के 'दादा' का राजनीतिक सफर
अजीत पवार का जन्म 22 जुलाई, 1959 को अहमदनगर में उनके दादा के घर हुआ था। वह शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। अजीत ने 1982 में राजनीति में कदम रखा और एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड के लिए चुने गए। उन्होंने 16 साल तक पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। इस दौरान वह बारामती से सांसद भी चुने गए। बाद में, उन्होंने शरद पवार के लिए यह सीट खाली कर दी। बारामती सीट पवार परिवार का गढ़ है। शरद पवार और अजीत पवार का इस सीट पर दबदबा रहा है।
1967 से 1990 तक शरद पवार इस निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे। उसके बाद, 1991 से अब तक अजीत पवार यहां से 8 बार विधायक चुने गए हैं। दोनों ने मिलकर कांग्रेस के बैनर तले 8 बार और एनसीपी के बैनर तले 4 बार जीत हासिल की है। शिवसेना या बीजेपी का कोई भी नेता इस सीट से कभी नहीं जीता है। 2010 में, अजीत पवार को महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी सरकार में पहली बार उपमुख्यमंत्री बनाया गया। वह अपने समर्थकों और जनता के बीच लोकप्रिय रूप से दादा के नाम से जाने जाते हैं। एक घोटाले की वजह से उन्हें सितंबर 2012 में इस्तीफ़ा देना पड़ा था। हालांकि, NCP ने एक व्हाइट पेपर जारी करके अजीत पवार को क्लीन चिट दे दी, और उन्होंने उप मुख्यमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल जारी रखा।

