केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari का एक बयान इन दिनों काफी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा— “जो करेगा जात की बात, उसको मारूंगा कस के लात।” इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
दरअसल, गडकरी यह बात एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कह रहे थे, जहां वे समाज में जातिवाद की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जता रहे थे। उनका कहना था कि देश की राजनीति और समाज को जाति के आधार पर बांटना सही नहीं है और इससे विकास प्रभावित होता है।
गडकरी ने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा कि उनकी सोच हमेशा विकास, योग्यता और काम के आधार पर आगे बढ़ने की रही है, न कि जाति या धर्म के आधार पर। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
उनका यह बयान भले ही सख्त शब्दों में था, लेकिन इसका मकसद समाज में फैले जातीय भेदभाव के खिलाफ एक मजबूत संदेश देना बताया जा रहा है।
हालांकि, कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं ने उनके बयान के लहजे पर सवाल भी उठाए हैं, जबकि उनके समर्थक इसे साफ और स्पष्ट सोच का उदाहरण बता रहे हैं।
कुल मिलाकर, गडकरी का यह बयान जातिवाद के मुद्दे पर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को हवा दे रहा है।

