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महाराष्ट्र में SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और राज्य सरकार से मांगा जवाब

महाराष्ट्र में SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और राज्य सरकार से मांगा जवाब

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम काटे जाने के आरोपों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें पुनरीक्षण प्रक्रिया को चुनौती देते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की गई है।

याचिका में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए अदालत से हस्तक्षेप करने की मांग की है। अब चुनाव आयोग और महाराष्ट्र सरकार को याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अपना पक्ष रखना होगा।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए?

याचिकाकर्ता अरुण आनंदगिरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने अदालत में दलील दी कि मुंबई और पुणे में पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण अस्थायी रूप से दूसरी जगह रहने गए कई मतदाताओं के नाम पुराने पते पर नहीं मिलने के आधार पर सूची से हटाए गए। याचिका में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और नाम बहाल कराने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 5 नवंबर को

सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को तत्काल राहत देने के बजाय संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर के लिए तय की। अदालत ने तत्काल मतदाता सूची को अंतिम रूप देने पर रोक नहीं लगाई। हालांकि, जरूरत पड़ने पर आगे निर्देश देने की संभावना खुली रखी।अब इस मामले में चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब पर नजर रहेगी। अदालत का आगे का रुख यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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