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NEET परीक्षा के तनाव में छात्रा ने दी जान, लातूर में आत्महत्या से सदमे में परिवार

NEET परीक्षा के तनाव में छात्रा ने दी जान, लातूर में आत्महत्या से सदमे में परिवार

महाराष्ट्र के Latur जिले के लातूर तालुका स्थित गोंडेगांव गांव से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां NEET परीक्षा से जुड़े मानसिक तनाव के बीच एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिवार और गांव में शोक का माहौल है।

परिजनों के अनुसार छात्रा लंबे समय से NEET परीक्षा और अपने भविष्य को लेकर तनाव में थी। छात्रा के पिता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह पढ़ाई को लेकर काफी दबाव महसूस कर रही थी और परीक्षा परिणाम तथा करियर को लेकर लगातार चिंता में रहती थी। परिवार ने उसे समझाने और हौसला बढ़ाने की कोशिश भी की, लेकिन वह मानसिक तनाव से उबर नहीं पाई।

जानकारी के मुताबिक घटना के समय परिवार के लोग घर पर ही मौजूद थे। जब काफी देर तक छात्रा कमरे से बाहर नहीं आई तो परिजनों ने दरवाजा खोला, जहां वह गंभीर हालत में मिली। तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह घटना एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता सामने लाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई छात्र अत्यधिक मानसिक दबाव का सामना करते हैं। लगातार पढ़ाई, अपेक्षाएं और भविष्य की चिंता कई बार छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर कर देती है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे समय में परिवार और शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। छात्रों के व्यवहार में तनाव, चिंता या अवसाद के संकेत दिखाई दें तो समय रहते उनकी काउंसलिंग और भावनात्मक सहायता जरूरी होती है।

NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को लेकर देशभर में लाखों छात्र तैयारी करते हैं। बेहतर रैंक और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने की होड़ के कारण कई छात्र खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव बना लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा को जीवन-मरण का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए और छात्रों को मानसिक रूप से संतुलित रखने पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।

घटना के बाद गांव और आसपास के इलाके में भी शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा प्रणाली को लेकर बहस तेज कर दी है।

यदि कोई छात्र लगातार तनाव, डर या अवसाद महसूस कर रहा हो, तो उसे परिवार, दोस्तों, शिक्षकों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से खुलकर बात करनी चाहिए। समय पर सहयोग और संवाद कई मुश्किल परिस्थितियों को टाल सकता है।

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