महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त का एक बयान चर्चा में आ गया है। ठाणे में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम के दौरान अभिनेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के बीच हुई बातचीत ने सियासी बहस को नया मोड़ दे दिया है।कार्यक्रम में संजय दत्त हिंदी में संबोधन कर रहे थे। इस दौरान मंत्री प्रताप सरनाइक ने उनसे मराठी में बोलने का आग्रह किया। इस पर संजय दत्त ने मजाकिया अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि वह छह साल येरवडा जेल में रहे, लेकिन तब भी मराठी नहीं सीख पाए।
मंच पर हुई हल्की-फुल्की बातचीत बनी चर्चा का विषय
प्रताप सरनाइक ने कहा कि आजकल वह सभी लोगों को मराठी सिखा रहे हैं, इसलिए उन्होंने सोचा कि संजय दत्त से भी मराठी में बात कराई जाए। उन्होंने कहा कि मराठी सभी समझते हैं और यह महाराष्ट्र की भाषा है।इसके जवाब में संजय दत्त ने पहले भगवान शिव का जयकारा लगाया और फिर कहा कि उन्होंने मराठी थोड़ी बहुत सीखने की कोशिश की थी, लेकिन पूरी तरह नहीं सीख पाए।
बयान पर शुरू हुई राजनीतिक चर्चा
संजय दत्त के इस बयान के बाद महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रही बहस फिर तेज हो गई है। भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आम लोगों पर मराठी बोलने का दबाव बनाया जाता है, लेकिन ऐसे मामलों में अलग रुख अपनाया जाता है।महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से मराठी भाषा के इस्तेमाल और उसे लेकर राजनीतिक दलों के बयानों पर विवाद चलता रहा है।
भाषा और पहचान को लेकर जारी है बहस
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को राज्य की पहचान से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, कई लोग यह भी कहते हैं कि भाषा सीखना व्यक्तिगत पसंद और सुविधा का विषय होना चाहिए।संजय दत्त का बयान इसी बहस के बीच सामने आया है, जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

