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पुणे पोर्श केस के 2 साल बाद भी न्याय का इंतजार: पीड़ित परिवार ने उठाए सिस्टम पर सवाल, फास्ट ट्रैक ट्रायल की मांग तेज

पुणे पोर्श केस के 2 साल बाद भी न्याय का इंतजार: पीड़ित परिवार ने उठाए सिस्टम पर सवाल, फास्ट ट्रैक ट्रायल की मांग तेज

पुणे पोर्श हिट-एंड-रन मामले को दो साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन मृतका अश्विनी कोष्टा के परिजनों को अब भी न्याय का इंतजार है। इस लंबी देरी और कानूनी प्रक्रिया की धीमी रफ्तार ने परिवार की पीड़ा को और बढ़ा दिया है।

परिजनों का कहना है कि मामले के सभी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि अब तक ट्रायल भी शुरू नहीं हो सका है। इससे आहत माता-पिता ने न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है।

मृतका के पिता ने कहा है कि शराब पीकर वाहन चलाना एक बेहद गंभीर और जघन्य अपराध है, जिस पर सख्त और तेज कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाए ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय मिल सके।

परिवार का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से न केवल न्याय में देरी होती है, बल्कि पीड़ितों के दर्द को भी लगातार बढ़ावा मिलता है। उनका आरोप है कि सिस्टम की धीमी कार्यप्रणाली के कारण आरोपी आज भी राहत की स्थिति में हैं।

इस मामले ने एक बार फिर देश में सड़क सुरक्षा और नशे में ड्राइविंग जैसे मुद्दों पर बहस को तेज कर दिया है। सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई जरूरी है ताकि उदाहरण पेश किया जा सके।

फिलहाल, पीड़ित परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है और मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने की मांग दोहरा रहा है। दूसरी ओर, कानूनी प्रक्रिया अपने तय चरणों में आगे बढ़ रही है, लेकिन गति को लेकर सवाल बने हुए हैं।

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