महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सबकुछ ठीक नहीं? सूखा राहत बैठक से दोनों डिप्टी CM गायब, सियासी चर्चाएं तेज
महाराष्ट्र में सूखे के संकट के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अहम बैठक से दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। राज्य में किसानों और ग्रामीण इलाकों के सामने पानी की कमी, फसल खराब होने और पशुओं के लिए चारे की समस्या जैसी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में सूखा राहत से जुड़ी बैठक में उपमुख्यमंत्रियों के शामिल नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी की वजह सामने आए बिना इसे महायुति सरकार में मतभेद का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।
सूखे की गंभीर स्थिति के बीच अहम बैठक
महाराष्ट्र में इस साल कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात बने हैं। सितंबर 2026 में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की 358 तहसीलों में से 265 में सूखा घोषित किया गया था। इसका असर खेती, पेयजल आपूर्ति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सूखे से निपटने के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की मांग भी कर चुके हैं। उन्होंने केंद्र के सामने करीब 17,500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का प्रस्ताव रखा था। सरकार की प्राथमिकताओं में फसल नुकसान का आकलन, किसानों को राहत, पीने के पानी की उपलब्धता और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था शामिल है।
बैठक से दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सूखे की समीक्षा से जुड़ी बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति को लेकर महायुति सरकार के भीतर नाराजगी और आपसी समन्वय पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में दोनों नेताओं के बैठक में शामिल नहीं होने का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने जानबूझकर बैठक से दूरी बनाई या इसके पीछे कोई राजनीतिक वजह थी।
क्या महायुति में बढ़ रही है खींचतान?
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सहयोगी दल शामिल हैं। इससे पहले भी कैबिनेट बैठक में एकनाथ शिंदे की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं। ऐसे में सूखा राहत बैठक से दोनों उपमुख्यमंत्रियों का अनुपस्थित रहना एक बार फिर गठबंधन के भीतर तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
लेकिन राजनीतिक चर्चाओं और वास्तविक मतभेदों में अंतर करना जरूरी है। किसी बैठक में शामिल नहीं होना अपने आप में गठबंधन में दरार का प्रमाण नहीं है। इसके लिए संबंधित नेताओं का पक्ष और अनुपस्थिति की आधिकारिक वजह सामने आना जरूरी है।
किसानों को राहत देना सरकार के सामने बड़ी चुनौती
राजनीतिक चर्चाओं के बीच महाराष्ट्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सूखा प्रभावित किसानों और ग्रामीण परिवारों को राहत पहुंचाना है। कम बारिश के कारण फसलों को नुकसान हुआ है और कई क्षेत्रों में पेयजल तथा पशुओं के चारे की व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है।
मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र से राहत राशि की मांग के बाद अब राहत पैकेज, नुकसान के आकलन और सहायता के वितरण पर नजर रहेगी। किसानों को समय पर मदद मिले, इसके लिए विभागों के बीच समन्वय और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी ने महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा जरूर तेज की है, लेकिन महायुति सरकार में किसी बड़े मतभेद की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में नेताओं की प्रतिक्रिया और सरकार के फैसलों से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

