5 महीने की गर्भवती होने के आधार पर निदा खान को मिली जमानत, कोर्ट ने FIR में भूमिका का भी किया जिक्र
एक मामले में अदालत ने आरोपी निदा खान की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दर्ज एफआईआर में निदा खान की कथित भूमिका का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की उस दलील को भी ध्यान में रखा, जिसमें बताया गया कि निदा खान 5 महीने की गर्भवती हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देने का फैसला किया। जज ने कहा कि एफआईआर में आरोपी की भूमिका का उल्लेख होने के बावजूद गर्भावस्था एक महत्वपूर्ण मानवीय और चिकित्सकीय पहलू है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बचाव पक्ष ने गर्भावस्था का दिया हवाला
निदा खान की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में जमानत की मांग करते हुए कहा कि आरोपी महिला 5 महीने की गर्भवती है। उन्होंने अदालत से मानवीय आधार पर राहत देने की अपील की।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि गर्भावस्था के दौरान जेल में रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए अदालत को इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए जमानत प्रदान करनी चाहिए।
कोर्ट ने एफआईआर में भूमिका को माना महत्वपूर्ण
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर में निदा खान की कथित भूमिका का उल्लेख मौजूद है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और जांच से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया। हालांकि, आरोपी की गर्भावस्था को देखते हुए अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
कोर्ट के इस फैसले के बाद निदा खान को राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब मामले से बरी होना नहीं है। मुकदमे की आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी और आरोपों पर अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही होगा।
मामले की जांच जारी
पुलिस और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही हैं। वहीं, अदालत ने जमानत देते समय जो भी शर्तें निर्धारित की हैं, उनका पालन आरोपी को करना होगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालतें महिलाओं से जुड़े मामलों में विशेष परिस्थितियों, जैसे गर्भावस्था और स्वास्थ्य स्थिति, को ध्यान में रखते हुए जमानत पर विचार कर सकती हैं। इस मामले में भी कोर्ट ने आरोपों के साथ-साथ आरोपी की व्यक्तिगत परिस्थिति को संतुलित करते हुए निर्णय लिया है।

