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महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा: आमने-सामने आए दानवे और सत्तार, वीडियो में जाने फिर उठी दोनों शिवसेना के एक होने की मांग

महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा: आमने-सामने आए दानवे और सत्तार, वीडियो में जाने फिर उठी दोनों शिवसेना के एक होने की मांग

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना के दोनों गुटों के संभावित एकीकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसकी वजह बनी उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के विधायक अब्दुल सत्तार की अचानक हुई मुलाकात।

जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं का काफिला रास्ते में आमने-सामने आ गया। इसके बाद दोनों नेता अपनी-अपनी गाड़ियों से उतरे और एक-दूसरे से गर्मजोशी से मिले। उन्होंने गले लगकर अभिवादन किया। इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में नए कयास लगने लगे।

दानवे बोले- दोनों शिवसेना को एक होना चाहिए

मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अंबादास दानवे ने कहा कि अब समय आ गया है कि शिवसेना के दोनों गुट फिर से एक हो जाएं। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ मेरी इच्छा से संभव नहीं है। इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति और इच्छा जरूरी है। अगर दोनों तरफ से सकारात्मक पहल हो, तो एकीकरण का रास्ता निकल सकता है।"दानवे के इस बयान को शिवसेना के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच लंबे समय से दोनों गुटों के एक मंच पर आने की चर्चा होती रही है।

अब्दुल सत्तार ने भी जताई सहमति

दानवे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल सत्तार ने कहा कि यदि एकनाथ शिंदे सहमति दे दें, तो दोनों शिवसेना गुटों को एक होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।सत्तार ने कहा कि पार्टी और कार्यकर्ताओं के हित में यदि ऐसा फैसला लिया जाता है तो उसका स्वागत किया जाएगा। उनके इस बयान ने भी राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।

उद्धव गुट के नेताओं ने भी दिया सकारात्मक संकेत

इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेता प्रथमेश गीते ने भी एकजुटता की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना हमेशा एक मजबूत और लोकप्रिय राजनीतिक शक्ति रही है।गीते ने कहा, "राजनीतिक मतभेदों के कारण पार्टी दो हिस्सों में बंट गई, लेकिन नाम और विचारधारा आज भी शिवसेना की ही है। अगर सभी लोग एक साथ आते हैं तो यह कार्यकर्ताओं और पार्टी दोनों के लिए बेहतर होगा।"

क्या फिर एक हो सकते हैं दोनों गुट?

साल 2022 में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। एक गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट की कमान एकनाथ शिंदे के हाथों में है। तब से दोनों गुटों के बीच राजनीतिक और कानूनी लड़ाई भी जारी रही है।हालांकि हालिया बयानों और नेताओं की सौहार्दपूर्ण मुलाकात ने यह संकेत जरूर दिया है कि दोनों पक्षों के कुछ नेता एकीकरण की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों गुटों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मगर दानवे और सत्तार की मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है कि क्या आने वाले समय में शिवसेना के दोनों गुट फिर से एक मंच पर नजर आ सकते हैं। फिलहाल इस सवाल का जवाब भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियां ही तय करेंगी।

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