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NEET-UG 2026 पेपर लीक केस में RCC क्लासेस संचालक की मुश्किलें बढ़ीं, पुणे मनपा ने अवैध निर्माण ध्वस्त किया

NEET-UG 2026 पेपर लीक केस में RCC क्लासेस संचालक की मुश्किलें बढ़ीं, पुणे मनपा ने अवैध निर्माण ध्वस्त किया

NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले में आरोपी ‘RCC क्लासेस’ के संचालक शिवराज मोटेगावकर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पुणे महानगरपालिका (PMC) ने शनिवार को डेक्कन इलाके में स्थित RCC क्लासेस के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया।

मनपा का कहना है कि निर्माण था अतिक्रमण
पुणे मनपा के अधिकारियों ने बताया कि इस भवन को बिना अनुमति और नियमों का पालन किए बनाया गया था। मनपा के अनुसार, यह निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में आता था, और आसपास के क्षेत्र की योजना और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करता था।

PMC के अधिकारी ने कहा, “हमने कई बार चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद निर्माण को नियमित नहीं किया गया। इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत इसे ध्वस्त किया गया।”

NEET-UG पेपर लीक केस में शिवराज मोटेगावकर
शिवराज मोटेगावकर पहले ही NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में आरोपी बन चुके हैं। उनके खिलाफ शिक्षा विभाग और पुलिस की जांच चल रही है। यह मामला देशभर में सुर्खियों में रहा क्योंकि इसके तहत कई छात्रों को पेपर लीक कराने का आरोप लगाया गया था।

पुणे पुलिस और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और छापेमारी की थी। इस दौरान कई डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज भी बरामद किए गए थे।

शिवराज मोटेगावकर पर बढ़ते दबाव
RCC क्लासेस का अवैध निर्माण ध्वस्त होने के बाद अब शिवराज मोटेगावकर पर कानूनी और सामाजिक दबाव दोनों बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध निर्माण और शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के आरोप मोटेगावकर की स्थिति को और जटिल बना देंगे।

शहरवासियों और माता-पिता ने मनपा की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि शिक्षा संस्थानों के कानून का उल्लंघन और अवैध निर्माण सहन नहीं किया जा सकता।

कानूनी प्रक्रिया और आगामी कार्रवाई
पुणे मनपा और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी, और अवैध निर्माण की जाँच पूरी होने तक कोई नया निर्माण या पुनः निर्माण नहीं होगा। इसके अलावा, NEET-UG पेपर लीक मामले में भी जांच तेज़ की जा रही है।

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में दोनों मामलों – शिक्षा में अनियमितता और अतिक्रमण – का समन्वय आवश्यक है, ताकि दोषियों को उचित दंड मिल सके और भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम हो।

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