Mumbai Water Crisis: मुंबई पर गहराया जल संकट, सिर्फ 45 दिन का पानी बचा; 10% कटौती लागू
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जल संकट गहराता जा रहा है। मानसून की दस्तक में देरी और जलाशयों में लगातार घटते जलस्तर के कारण शहर के सामने पानी की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। स्थिति को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू कर दी है और नागरिकों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की है।
केवल 45 दिन का जल भंडार शेष
बीएमसी के अनुसार, मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली झीलों में जल स्तर लगातार घट रहा है। मौजूदा स्थिति में शहर के पास लगभग 45 दिनों का जल भंडार बचा है। यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है।
लागू हुई 10% पानी कटौती
जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन 10 प्रतिशत जल कटौती का फैसला लिया है। इसका असर घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक जल आपूर्ति पर पड़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम उपलब्ध जल संसाधनों को अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।
नागरिकों से की गई अपील
बीएमसी ने लोगों से पानी की बर्बादी रोकने और जरूरत के अनुसार ही उपयोग करने की अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
मानसून पर टिकी उम्मीदें
हर साल मुंबई की जल आपूर्ति काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। इस बार मानसून की धीमी प्रगति के कारण झीलों में अपेक्षित जल संचय नहीं हो पाया है। अब प्रशासन और नागरिकों की नजर आगामी बारिश पर टिकी हुई है।
समुद्री पानी को मीठा बनाने की योजना
भविष्य में जल संकट से निपटने के लिए समुद्री खारे पानी को मीठे पानी में बदलने की परियोजना पर भी काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परियोजनाएं लंबे समय में मुंबई की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकती हैं।
बढ़ सकती है चुनौती
यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो पानी की कटौती बढ़ाने जैसे अतिरिक्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। प्रशासन लगातार झीलों के जलस्तर की निगरानी कर रहा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
मुंबई में जल संकट ने एक बार फिर जल संरक्षण और वैकल्पिक जल स्रोतों की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। फिलहाल शहर की सबसे बड़ी उम्मीद समय पर होने वाली मानसूनी बारिश पर टिकी हुई है।

