दिल्ली में ‘प्रणव’ कार्यालय का उद्घाटन, मोहन भागवत ने संस्कृत को बताया भारत को समझने की कुंजी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय ‘प्रणव’ का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के प्रमुख मोहन भागवत ने शिरकत की और संस्कृत भाषा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि भारत को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन अनिवार्य है, क्योंकि यह भाषा न केवल हमारी प्राचीन परंपराओं को जोड़ती है, बल्कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी संरक्षित रखती है। उन्होंने संस्कृत को भारतीय संस्कारों और मूल्यों का आधार बताया।
इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान और दर्शन की समृद्ध परंपरा का माध्यम है, जो आने वाली पीढ़ियों को भारत की जड़ों से जोड़ने का कार्य करती है।
कार्यक्रम में संस्कृत भारती से जुड़े कई विद्वान और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि ‘प्रणव’ कार्यालय का उद्देश्य संस्कृत के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना और इसे आधुनिक समाज से जोड़ना है।
संस्कृत भारती के पदाधिकारियों ने कहा कि संस्था लंबे समय से देशभर में संस्कृत को जन-भाषा बनाने की दिशा में काम कर रही है और नए केंद्र के शुरू होने से इस अभियान को और मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में संस्कृत के अध्ययन और इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की भी जानकारी दी गई।
फिलहाल, यह उद्घाटन समारोह सांस्कृतिक और शैक्षिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारतीय परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

