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महाराष्ट्र की राजनीति में फिर हलचल, शिंदे गुट का दावा- उद्धव सेना के 7 सांसद संपर्क में, 'वीडियो में जाने ऑपरेशन टाइगर' अंतिम चरण में

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर हलचल, शिंदे गुट का दावा- उद्धव सेना के 7 सांसद संपर्क में, 'वीडियो में जाने ऑपरेशन टाइगर' अंतिम चरण में

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। शिवसेना के शिंदे गुट के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसद उनके संपर्क में हैं और जल्द ही बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है। तुमाने के इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

कृपाल तुमाने ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत पिछले एक महीने से लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और मानसून सत्र शुरू होने से पहले उद्धव ठाकरे गुट के सात सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, तुमाने ने उन सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन उनके इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि यदि ऐसा होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। वर्ष 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी टूट के बाद यह पहली बार है जब पार्टी के सांसदों के दल बदलने की संभावना को लेकर इस तरह के दावे सामने आए हैं।

इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संभावित राजनीतिक हलचल को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने 14 जून को अपने सभी सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में उन्होंने पार्टी की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों से साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे रोका नहीं जाएगा।

बैठक में उद्धव ठाकरे ने कहा, "अगर किसी को जाना है तो वह खुशी-खुशी जा सकता है। पार्टी किसी पर दबाव नहीं बनाएगी।" उनके इस बयान को संभावित बगावत की अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है।

उद्धव ठाकरे ने बैठक में वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी टूट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्हें पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों और संभावित बगावत की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव डालने या रोकने की कोशिश नहीं की थी। उनका मानना है कि राजनीतिक दल में रहने या छोड़ने का फैसला प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत निर्णय होता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कृपाल तुमाने के दावे और उद्धव ठाकरे के हालिया बयान महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव का संकेत हो सकते हैं। हालांकि अभी तक उद्धव ठाकरे गुट की ओर से सात सांसदों के संपर्क में होने के दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल सभी की निगाहें आगामी मानसून सत्र पर टिकी हैं। यदि शिंदे गुट का दावा सही साबित होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शक्ति संतुलन बदल सकता है। वहीं दूसरी ओर, यह देखना भी दिलचस्प होगा कि उद्धव ठाकरे अपने संगठन को एकजुट रखने के लिए आगे क्या रणनीति अपनाते हैं।

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