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महाराष्ट्र में आदिवासी हॉस्टल में रहने की 30 साल की उम्र सीमा खत्म, वीडियो में जाने सरकार ने वापस लिया संशोधित नियम

महाराष्ट्र में आदिवासी हॉस्टल में रहने की 30 साल की उम्र सीमा खत्म, वीडियो में जाने सरकार ने वापस लिया संशोधित नियम

 

महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए तय की गई अधिकतम उम्र सीमा को खत्म कर दिया है। आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने मंगलवार को बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मंजूरी के बाद 14 अगस्त को जारी सरकारी प्रस्ताव (GR) और उससे जुड़े संशोधित नियम वापस ले लिए गए हैं। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब आदिवासी हॉस्टल के नए नियमों को लेकर छात्रों में नाराजगी थी। नियमों में बदलाव का मुद्दा पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान भी उठा था। कार्यक्रम में एक छात्रा ने हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए थे।

पहले 26 साल थी अधिकतम उम्र

महाराष्ट्र सरकार ने 5 अगस्त को आदिवासी हॉस्टल के लिए नए नियम लागू किए थे। इनमें हॉस्टल में रहने के लिए अधिकतम उम्र 26 साल तय की गई थी। नए नियमों को लेकर छात्रों और छात्र संगठनों की ओर से विरोध शुरू हो गया।इसके बाद सरकार ने 14 अगस्त को नियमों में बदलाव किया और अधिकतम उम्र सीमा को 26 से बढ़ाकर 30 साल कर दिया। हालांकि, उम्र सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद छात्रों का विरोध जारी रहा।अब सरकार ने 14 अगस्त को जारी GR और उससे जुड़े संशोधित नियमों को वापस लेने का फैसला किया है। इसके साथ ही आदिवासी हॉस्टल में रहने के लिए तय 30 साल की अधिकतम उम्र सीमा भी खत्म हो गई है।

राहुल गांधी के कार्यक्रम में उठा था मुद्दा

यह फैसला राहुल गांधी के पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तीन दिन बाद आया है। कार्यक्रम में एक छात्रा ने आदिवासी हॉस्टल के नए नियमों और वहां रहने वाली छात्राओं को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया था।छात्रा ने आरोप लगाया था कि लंबी छुट्टी के बाद हॉस्टल लौटने वाली छात्राओं को प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने के लिए मजबूर किया जाता है। इस आरोप के बाद हॉस्टल में छात्राओं के साथ व्यवहार और नियमों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई थी।

सरकार ने लिया नियम वापस लेने का फैसला

आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद 14 अगस्त का सरकारी प्रस्ताव और उससे जुड़े संशोधित नियम वापस ले लिए गए हैं। सरकार के इस फैसले से आदिवासी हॉस्टल में उम्र सीमा को लेकर छात्रों के बीच जारी विवाद फिलहाल खत्म होने की उम्मीद है।हालांकि, हॉस्टल में छात्राओं से जुड़े लगाए गए गंभीर आरोपों और वहां लागू व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। इन मुद्दों पर सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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