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'तुम चैन से कैसे सो सकते हो', मुंबई का प्रदूषण देख भड़का हाईकोर्ट; खूब लताड़ा

'तुम चैन से कैसे सो सकते हो', मुंबई का प्रदूषण देख भड़का हाईकोर्ट; खूब लताड़ा

मुंबई में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि यह हैरान करने वाला है कि समुद्र किनारे बसा मुंबई शहर प्रदूषण के मामले में देश की राजधानी दिल्ली से भी आगे निकल रहा है। हाईकोर्ट ने त्योहारों के दौरान पटाखे जलाने और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम पर रोक से जुड़े आदेशों को ठीक से लागू नहीं करने पर पुलिस और नागरिक निकायों को फटकार लगाई।

जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने बुधवार को प्रदूषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB), नागरिक अधिकारियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। यह मामला प्रदूषण पर अदालत की ओर से स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका से जुड़ा है।

समुद्र किनारे होने के बावजूद प्रदूषण क्यों बढ़ रहा?

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि मुंबई को अपनी भौगोलिक स्थिति का स्वाभाविक फायदा मिलता है, लेकिन इसके बावजूद शहर की हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है। उन्होंने समुद्री हवा और खुले स्थानों का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई का आसमान साफ रहना चाहिए।अदालत ने यह भी चिंता जताई कि प्रदूषण के स्तर के मामले में मुंबई अब दिल्ली को पीछे छोड़ रही है। पीठ के मुताबिक, मंगलवार को शहर में दृश्यता घटकर 500 मीटर से भी कम रह गई थी। जस्टिस कुलकर्णी ने अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब लाखों नागरिक आपात स्थिति जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी चैन से कैसे सो सकते हैं।

पटाखों और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम पर रोक लागू नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि उसके पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद नियमों का लगातार उल्लंघन हो रहा है। अदालत ने विशेष रूप से जुलूसों में म्यूजिक सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए पूर्व अनुमति लेने और निर्धारित डेसीबल सीमा का पालन करने की शर्तों को लागू नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई।पीठ ने यह भी कहा कि व्यस्त सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे जलाने पर प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा है। अदालत के मुताबिक, उसके आदेशों का बार-बार उल्लंघन हो रहा है और संबंधित अधिकारी बुनियादी निर्देशों का पालन कराने में भी सुस्ती दिखा रहे हैं।

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