ओल्ड मॉन्क विवाद में FSSAI का दावा, मामला सिर्फ लेबल का नहीं; प्रोडक्ट की बनावट पर उठे सवाल
ओल्ड मॉन्क से जुड़े विवाद में अदालत में सुनवाई के दौरान भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से महत्वपूर्ण दलील पेश की गई। FSSAI के वकील ने अदालत में स्पष्ट किया कि विवाद केवल बोतल पर लिखे लेबल तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रोडक्ट की वास्तविक बनावट भी इस मामले का अहम हिस्सा है।
न्यूट्रल स्पिरिट में रम फ्लेवर मिलाने का दावा
सुनवाई के दौरान FSSAI के वकील ने कहा कि ओल्ड मॉन्क में इस्तेमाल होने वाली न्यूट्रल स्पिरिट में रम फ्लेवर मिलाया गया है। यानी विवाद इस बात को लेकर भी है कि उत्पाद को तैयार करने में किन घटकों और किस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया है।FSSAI की ओर से अदालत में रखी गई दलील के मुताबिक, इसलिए इस मामले को सिर्फ बोतल पर लिखी जानकारी या लेबलिंग से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
अदालत में प्रोडक्ट की प्रकृति पर चर्चा
सुनवाई के दौरान प्रोडक्ट की प्रकृति और उसकी संरचना को लेकर दलीलें सामने आईं। FSSAI की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि मामले में यह देखना जरूरी है कि उत्पाद वास्तव में किस तरह तैयार किया गया है और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री क्या है।इससे विवाद का दायरा केवल पैकेजिंग या लेबल से आगे बढ़कर उत्पाद की संरचना और मानकों तक पहुंच जाता है।
लेबलिंग से अलग है मामला
FSSAI के वकील की दलील के अनुसार, यदि विवाद केवल लेबल पर लिखी जानकारी को लेकर होता तो मामला अलग होता। लेकिन यहां उत्पाद में इस्तेमाल सामग्री और उसकी बनावट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।अदालत में हुई सुनवाई के दौरान इसी बिंदु को प्रमुखता से रखा गया। हालांकि, मामले में अंतिम स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगे की सुनवाई पर टिकी नजर
ओल्ड मॉन्क से जुड़े इस विवाद में अदालत के सामने अब उत्पाद की संरचना, उसमें इस्तेमाल सामग्री और संबंधित खाद्य सुरक्षा मानकों जैसे पहलुओं पर विचार होना अहम है। FSSAI की ओर से रखी गई दलीलों के बाद मामले की सुनवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।फिलहाल अदालत में हुई सुनवाई में FSSAI ने स्पष्ट किया है कि विवाद केवल बोतल के लेबल का नहीं, बल्कि उत्पाद की बनावट से भी जुड़ा हुआ है।

