राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोप पर फडणवीस का पलटवार, बोले- उनका दिमाग चोरी हो गया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। फडणवीस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई वोट चोरी नहीं हुई है, बल्कि राहुल गांधी का दिमाग चोरी हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से ऐसी समिति बनाने की बात भी कही, जो राहुल गांधी का ‘दिमाग वापस लाए’, ताकि वे देशहित और सच की बात कर सकें।
फडणवीस ने चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के भरोसे को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, रिजर्व बैंक और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक जैसी संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने से जनता के मन में इन संस्थाओं को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से और सर्वसम्मति से लिए गए। फडणवीस के मुताबिक, किसी भी चुनाव आयुक्त ने इन फैसलों पर अलग राय दर्ज नहीं कराई है।
दरअसल, राहुल गांधी और विपक्षी दलों की ओर से मतदाता सूची और SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की गई है। यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद और बढ़ा, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्ति जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर स्पष्टीकरण देते हुए फैसलों को सामूहिक और सर्वसम्मत बताया है।
फडणवीस ने विपक्ष के आगामी विरोध प्रदर्शनों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के संदर्भ में पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में SIR के दौरान मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी आई, वहां भी तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की। उन्होंने इस उदाहरण को विपक्ष के दावों पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया।
इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों, SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं।

