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बीएमसी चुनाव: मुंबई महानगरपालिका से खत्म हुआ ठाकरे परिवार का दबदबा, महायुति को बहुमत; कंगना रनौत का आया बयान

बीएमसी चुनाव: मुंबई महानगरपालिका से खत्म हुआ ठाकरे परिवार का दबदबा, महायुति को बहुमत; कंगना रनौत का आया बयान

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। इन नतीजों के साथ ही मुंबई महानगरपालिका से ठाकरे परिवार का दशकों पुराना वर्चस्व खत्म हो गया है। चुनाव परिणामों में महायुति गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है, जिसके चलते अब लंबे समय बाद मुंबई को बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) का महापौर मिलने जा रहा है।

बीएमसी को देश की सबसे अमीर नगर निगमों में गिना जाता है और यहां सत्ता पर कब्जा महाराष्ट्र की राजनीति में बेहद अहम माना जाता है। अब तक इस पर शिवसेना (ठाकरे गुट) का प्रभाव रहा है, लेकिन इस बार के नतीजों ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—दोनों के लिए यह चुनाव करारा झटका माना जा रहा है।

महायुति को मिले बहुमत के बाद बीजेपी और शिंदे गुट के नेताओं में जश्न का माहौल है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह जीत मुंबई की जनता के भरोसे और विकास की राजनीति की जीत है। वहीं ठाकरे गुट के खेमे में निराशा साफ देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना में हुए विभाजन और बदले हुए गठबंधनों का सीधा असर इस चुनाव में देखने को मिला।

बीएमसी चुनाव परिणामों के बाद अब बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत का भी बयान सामने आया है। कंगना ने ठाकरे परिवार की हार पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “राजनीति में बदलाव और जनता के फैसले” से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और सत्ता किसी की स्थायी नहीं होती। कंगना पहले भी मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर खुलकर बयान देती रही हैं, ऐसे में उनका यह बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

कंगना रनौत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों की राजनीतिक रणनीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। बीएमसी जैसे बड़े नगर निगम से सत्ता का जाना ठाकरे परिवार के लिए केवल प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रतीकात्मक नुकसान भी माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस चुनाव परिणाम का असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। मुंबई जैसे महानगर में महायुति की पकड़ मजबूत होना विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। वहीं बीजेपी के लिए यह जीत महाराष्ट्र में अपनी स्थिति और मजबूत करने का मौका मानी जा रही है।

बीएमसी में नई सरकार बनने के साथ ही अब महापौर पद को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि बीजेपी या शिवसेना (शिंदे गुट) के किसी वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। आने वाले दिनों में सत्ता हस्तांतरण और नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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