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BMC चुनाव परिणाम: ठाकरे परिवार का दशकों पुराना वर्चस्व खत्म, संजय राउत बोले– ‘जयचंदों’ की वजह से हारे, तख्तापलट अभी बाकी

BMC चुनाव परिणाम: ठाकरे परिवार का दशकों पुराना वर्चस्व खत्म, संजय राउत बोले– ‘जयचंदों’ की वजह से हारे, तख्तापलट अभी बाकी

महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के नतीजे सामने आते ही ठाकरे परिवार का सालों पुराना राज समाप्त हो गया। पहली बार ऐसा हुआ है जब शिवसेना (यूबीटी) बहुमत से दूर नजर आई है और बीजेपी के पास अपना मेयर बनाने का मजबूत मौका बन गया है। इन नतीजों ने न सिर्फ राजनीतिक समीकरण बदले हैं, बल्कि शिवसेना के अंदर भी उथल-पुथल तेज कर दी है।

चुनाव परिणामों के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का तीखा बयान सामने आया है। उन्होंने हार के लिए पार्टी के भीतर ही मौजूद “जयचंदों” को जिम्मेदार ठहराया। संजय राउत ने कहा, “यह हार जनता की नहीं है, यह विश्वासघात की हार है। हमारे अपने लोगों ने पीठ में छुरा घोंपा, जिसकी वजह से यह नतीजे आए।”

संजय राउत यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है और राजनीतिक हालात कभी भी बदल सकते हैं। राउत के मुताबिक, “महाराष्ट्र की राजनीति में तख्तापलट कोई नई बात नहीं है। जरूरत पड़ी तो हम भी रणनीति बदलेंगे। अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।”

बीएमसी चुनावों में बीजेपी ने इस बार आक्रामक रणनीति अपनाई थी। लंबे समय से मुंबई की सत्ता से बाहर रही बीजेपी ने स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के आरोपों और प्रशासनिक पारदर्शिता को चुनावी हथियार बनाया। इसका असर यह हुआ कि पार्टी न सिर्फ मजबूत स्थिति में पहुंची, बल्कि मेयर पद पर दावा ठोकने की स्थिति में आ गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना के विभाजन का सीधा असर इन नतीजों पर पड़ा है। एक ओर एकनाथ शिंदे गुट, दूसरी ओर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) — इस बंटवारे ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को कमजोर कर दिया। इसका फायदा बीजेपी को मिला।

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के भीतर अब आत्ममंथन शुरू हो गया है। पार्टी के कई नेता खुले तौर पर स्वीकार कर रहे हैं कि जमीनी स्तर पर संगठन कमजोर पड़ा और आपसी कलह ने नुकसान पहुंचाया। संजय राउत के “जयचंद” वाले बयान को इसी अंदरूनी असंतोष का संकेत माना जा रहा है।

बीएमसी पर लंबे समय तक ठाकरे परिवार का नियंत्रण सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और आर्थिक रूप से भी बेहद अहम माना जाता था। ऐसे में इस किले का ढहना शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा झटका है। दूसरी ओर बीजेपी इसे मुंबई में अपने विस्तार की ऐतिहासिक जीत मान रही है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बीजेपी वाकई अपना मेयर बना पाएगी, या फिर संजय राउत के बयान के मुताबिक कोई नया राजनीतिक उलटफेर देखने को मिलेगा। फिलहाल, इतना तय है कि बीएमसी चुनावों ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक नई दिशा और नई बहस दे दी है।

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