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शिवसेना में बड़ी टूट: उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों की बगावत, वीडियो में जाने शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज

शिवसेना के स्थापना दिवस यानी 19 जून से ठीक एक दिन पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने बगावत कर दी। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है और “ऑपरेशन टाइगर” की चर्चा तेज हो गई है।  सूत्रों के अनुसार, इन बागी सांसदों ने एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष को एक चिट्ठी सौंपी थी, जिसमें उन्होंने पार्टी से अलग होने के अपने कारणों का उल्लेख किया है। चिट्ठी में दावा किया गया है कि शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता पार्टी का विलय कांग्रेस में करने की दिशा में विचार कर रहे थे, जिससे पार्टी की मूल विचारधारा प्रभावित हो रही थी।  विचारधारा बदलने का आरोप  बागी सांसदों ने आरोप लगाया है कि Uddhav Thackeray अब अपनी मूल राजनीतिक विचारधारा से दूर जा चुके हैं। उनका कहना है कि पार्टी के अस्तित्व को बचाने और संगठन की मूल पहचान बनाए रखने के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। सांसदों ने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उनके पास अलग होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।  इस घटनाक्रम ने शिवसेना (यूबीटी) खेमे में चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के भीतर पहले से ही संगठनात्मक स्तर पर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के एक साथ बगावत करने से राजनीतिक समीकरण बदलने की आशंका जताई जा रही है।  शिंदे गुट में जाने की अटकलें  शिवसेना के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत खैरे ने दावा किया है कि बागी सांसद अब मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो गए हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया है। हालांकि, अब तक इन सांसदों की ओर से आधिकारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है।  राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह घटनाक्रम लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) की ताकत को भी प्रभावित कर सकता है।  लोकसभा स्पीकर को सौंपी गई चिट्ठी  बताया जा रहा है कि बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को सौंपी गई चिट्ठी में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाने की बात कही है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि संगठनात्मक निर्णयों में उनकी राय को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था, जिससे असंतोष बढ़ता गया।  महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल  शिवसेना में हुई इस टूट के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर सभी प्रमुख दलों की नजर रहेगी। यह भी माना जा रहा है कि यह विवाद केवल संगठनात्मक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।  फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि शिवसेना के भीतर यह टूट आने वाले समय में पार्टी और राज्य दोनों की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।

शिवसेना के स्थापना दिवस यानी 19 जून से ठीक एक दिन पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने बगावत कर दी। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है और “ऑपरेशन टाइगर” की चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, इन बागी सांसदों ने एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष को एक चिट्ठी सौंपी थी, जिसमें उन्होंने पार्टी से अलग होने के अपने कारणों का उल्लेख किया है। चिट्ठी में दावा किया गया है कि शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता पार्टी का विलय कांग्रेस में करने की दिशा में विचार कर रहे थे, जिससे पार्टी की मूल विचारधारा प्रभावित हो रही थी।

विचारधारा बदलने का आरोप

बागी सांसदों ने आरोप लगाया है कि Uddhav Thackeray अब अपनी मूल राजनीतिक विचारधारा से दूर जा चुके हैं। उनका कहना है कि पार्टी के अस्तित्व को बचाने और संगठन की मूल पहचान बनाए रखने के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। सांसदों ने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उनके पास अलग होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

इस घटनाक्रम ने शिवसेना (यूबीटी) खेमे में चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के भीतर पहले से ही संगठनात्मक स्तर पर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के एक साथ बगावत करने से राजनीतिक समीकरण बदलने की आशंका जताई जा रही है।

शिंदे गुट में जाने की अटकलें

शिवसेना के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत खैरे ने दावा किया है कि बागी सांसद अब मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो गए हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया है। हालांकि, अब तक इन सांसदों की ओर से आधिकारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह घटनाक्रम लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) की ताकत को भी प्रभावित कर सकता है।

लोकसभा स्पीकर को सौंपी गई चिट्ठी

बताया जा रहा है कि बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को सौंपी गई चिट्ठी में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाने की बात कही है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि संगठनात्मक निर्णयों में उनकी राय को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था, जिससे असंतोष बढ़ता गया।

महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

शिवसेना में हुई इस टूट के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर सभी प्रमुख दलों की नजर रहेगी। यह भी माना जा रहा है कि यह विवाद केवल संगठनात्मक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि शिवसेना के भीतर यह टूट आने वाले समय में पार्टी और राज्य दोनों की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।

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