Samachar Nama
×

यवतमाल में बड़ा साइबर घोटाला उजागर: 1300 की आबादी वाले गांव से बने 27 हजार से ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्र, SIT गठित

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में साइबर क्राइम का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अरनी तहसील का एक छोटा सा गांव देश भर का ध्यान खींच रहा है। इसकी वजह यह है कि 1,300 की आबादी वाले गांव से 25,000 से ज़्यादा डेथ और बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने इस मामले में बिहार के एक 20 साल के युवक को गिरफ्तार किया है। महाराष्ट्र सरकार ने भी पूरे मामले की जांच के लिए एक SIT बनाई है।  PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट फ्रॉड के हज़ारों मामले तब सामने आए जब डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर ने शेंदुरसानी ग्राम पंचायत के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) का इंस्पेक्शन किया। जांच में पता चला कि गांव की आबादी सिर्फ़ 1,300 थी, फिर भी अब तक 27,000 बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट जारी किए जा चुके हैं।  अब तक की जांच में पता चला है कि पिछले महीने सर्टिफिकेट का एक पूरा बैच बनाया गया था। इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन देखकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। सरकार ने अब इस मामले की जांच के लिए एक SIT बनाई है।  बिहार का एक युवक गिरफ्तार जन्म और मृत्यु सर्टिफिकेट मामले में शुरुआती कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बिहार के 20 साल के आदर्श कुमार दुबे को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि आरोपी ने सरकारी सर्वर हैक करके देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए ये नकली सर्टिफिकेट जारी किए थे। युवक को 12 जनवरी तक कस्टडी में भेज दिया गया है।  शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई यवतमाल शहर के पुलिस स्टेशन में इंडियन पीनल कोड (IPC) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एक क्रिमिनल केस दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी जांच यवतमाल के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता और संभावित नतीजों को देखते हुए, होम डिपार्टमेंट ने महाराष्ट्र साइबर के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ADG) की देखरेख में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से पूरी जांच शुरू करने का फैसला किया है। SIT टीम के इस हफ्ते गांव का दौरा करने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से एक बड़े साइबर अपराध का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर आम लोगों तक को हैरान कर दिया है। जिले के एक छोटे से गांव, जिसकी कुल आबादी महज 1300 के आसपास है, वहां से 27,000 से अधिक फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने का खुलासा हुआ है। इस गंभीर मामले में पुलिस ने बिहार से एक 20 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब प्रशासन को सरकारी पोर्टल पर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की संख्या को लेकर गंभीर अनियमितताएं नजर आईं। जांच करने पर पता चला कि एक ही गांव से असामान्य रूप से हजारों प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, जबकि वास्तविक जनसंख्या से इसका कोई मेल नहीं बैठ रहा था। इस विसंगति के बाद साइबर सेल और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की।

जांच में सामने आया कि सरकारी सिस्टम में सेंध लगाकर फर्जी तरीके से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे। इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल पहचान पत्र, पासपोर्ट, बैंक खाता, सरकारी योजनाओं और अन्य दस्तावेजों को हासिल करने में किया जा सकता था। अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जिसका नेटवर्क महाराष्ट्र के बाहर तक फैला हुआ है।

पुलिस ने इस मामले में बिहार के रहने वाले 20 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने तकनीकी माध्यमों से सरकारी पोर्टल का दुरुपयोग किया। प्रारंभिक पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। आरोपी के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और कितने समय से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने SIT का गठन कर दिया है। SIT में साइबर अपराध विशेषज्ञ, राजस्व विभाग और गृह विभाग के अधिकारी शामिल किए गए हैं। यह टीम पूरे मामले की तह तक जाकर यह पता लगाएगी कि सरकारी सिस्टम में सुरक्षा चूक कहां हुई और किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत रही। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि फर्जी प्रमाण पत्र किन-किन लोगों को जारी किए गए और उनका इस्तेमाल कहां-कहां हुआ।

Share this story

Tags