महाराष्ट्र के कल्याण शहर में एक 30 वर्षीय बैंक कर्मचारी ने आवारा कुत्ते के काटने के बाद मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या कर ली। पीड़ित ने कुत्ते के काटने के तुरंत बाद रेबीज का टीका लगवाया था, लेकिन मानसिक रूप से वह इस खौफ से बाहर नहीं निकल पाया।
पुलिस ने बताया कि मृतक के सुसाइड नोट से स्पष्ट हुआ है कि उसने अपनी जान लेने का निर्णय रेबीज की बीमारी के डर के कारण किया। सुसाइड नोट में उसने लिखा कि उसने कई बार अपने स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर चिंता जताई, लेकिन बीमारी के डर ने उसे इस कदम के लिए मजबूर कर दिया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि घटना के समय कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। मृतक के परिवार और दोस्तों ने भी बताया कि वह सदैव चिंता और डर की स्थिति में रहता था और इस बार रेबीज के डर ने उसकी मानसिक स्थिति को और खराब कर दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा जानवरों से होने वाली बीमारियों का डर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। यह घटना इस बात की ओर संकेत करती है कि मानसिक स्वास्थ्य और डर से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी तरह के जानवर काटने या बीमारियों के डर के मामले में परिवार और चिकित्सकों से तुरंत मानसिक समर्थन लेना चाहिए, ताकि व्यक्ति भय और चिंता के चलते गलत कदम न उठाए।
पुलिस ने मृतक के परिवार को घटना की जानकारी दी और शव का पोस्टमॉर्टम कराया। साथ ही, उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को मानसिक दबाव या अत्यधिक चिंता का सामना करना पड़ रहा हो, तो तुरंत मनोचिकित्सक या हेल्पलाइन से संपर्क करें।
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि आवारा कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। वहीं, रेबीज के डर से मानसिक परेशानियों को कम करने के लिए समय पर चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेने पर जोर दिया गया है।
इस दुखद घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। डर और चिंता की स्थिति में व्यक्ति किसी भी तरह के गलत कदम उठा सकता है, इसलिए परिवार, मित्र और चिकित्सक सहयोग का होना बेहद महत्वपूर्ण है।
कल्याण की यह घटना लोगों को चेतावनी देती है कि किसी भी जानवर के काटने या बीमारियों के डर के मामले में साथी और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लेना बेहद जरूरी है, ताकि मानसिक दबाव के चलते कोई असमय कदम न उठाए।

