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SIR विवाद के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, मतदाताओं के नाम हटाने पर रोक का आदेश देने से किया इनकार

SIR विवाद के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, मतदाताओं के नाम हटाने पर रोक का आदेश देने से किया इनकार

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। अदालत ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए तत्काल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि SIR से जुड़े मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित हैं, ऐसे में हाई कोर्ट द्वारा समानांतर कार्यवाही करना उचित नहीं होगा।

सुनवाई मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ के सामने हुई। याचिका में महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाने पर फिलहाल रोक लगाई जाए।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह आग्रह किया गया कि कम से कम ऐसा निर्देश दिया जाए कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने तक मतदाता सूची से किसी का नाम नहीं हटाया जाए। हालांकि, अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ऐसा कोई आदेश जारी नहीं करेगी और न्यायिक मर्यादा का पालन करेगी।

अदालत के सामने यह भी बताया गया कि SIR से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में SIR से संबंधित मामलों पर सुनवाई करने वाला है। इसी वजह से बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से परहेज किया।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि मतदाता सूची में नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को उचित प्रक्रिया के तहत सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।

SIR को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद भी लगातार जारी है। विपक्षी दल मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत किए जाने की बात कही गई है।

गौरतलब है कि बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ भी हाल में SIR के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग से सवाल कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि अंतिम मतदाता सूची तैयार होने से पहले केवल ड्राफ्ट सूची के आधार पर नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकती और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

फिलहाल महाराष्ट्र में SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी है। अब 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर भी नजर रहेगी, जहां महाराष्ट्र में SIR और मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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