इतिहास में तीन शताब्दियों पहले टूटी एक परंपरा को फिर से जीवित किया गया, जब बुधवार को मारवाड़ के पांच गांवों के राजपुरोहितों ने उदयपुर के सिटी पैलेस में प्रवेश किया। यह क्षण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद खास रहा, क्योंकि ये गांव पाली जिले के देसूरी क्षेत्र के पास स्थित हैं और मेवाड़ की अंतिम सीमा से जुड़े हुए हैं।
इन पांच गांवों के राजपुरोहित हुए शामिल
यह ऐतिहासिक यात्रा करने वाले गांव थे:
✅ घेनड़ी
✅ पिलोवणी
✅ वणदार
✅ रूंगड़ी
✅ शिवतलाव
ये सभी गांव राजस्थान के पाली जिले में स्थित हैं और ऐतिहासिक रूप से मेवाड़ की सीमाओं से जुड़े रहे हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परंपरा?
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300 साल पहले किसी कारणवश यह परंपरा टूट गई थी और इन गांवों के राजपुरोहितों का सिटी पैलेस में आना बंद हो गया था।
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इतिहास के पन्नों में दर्ज इस परंपरा को फिर से स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे थे, जो अब जाकर सफल हुए।
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इसे राजपूताना इतिहास और परंपराओं के पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है।
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने किया स्वागत
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उदयपुर राजघराने के उत्तराधिकारी लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इन गांवों के प्रतिनिधियों का सिटी पैलेस में गर्मजोशी से स्वागत किया।
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इस ऐतिहासिक क्षण को और भी विशेष बनाते हुए अरविंद सिंह मेवाड़ की एक भव्य तस्वीर इन गांवों के प्रतिनिधियों को भेंट की गई।
इतिहास और संस्कृति का संगम
यह आयोजन राजस्थानी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि क्या यह नवजीवित परंपरा आगे भी जारी रहेगी और क्या इसे एक नई ऐतिहासिक पहचान मिलेगी।