देश का आईटी हब बेंगलुरु भारी जल संकट से घिरा हुआ है। रांची की भी स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है। रांची शहरी क्षेत्र में कुछ साल पहले तक जहां 250-300 फीट बोरवेल करने पर पानी मिल रहा था, वह और नीचे चला गया है। मेन रोड, लालपुर, कोकर समेत शहर के कुछ इलाकों को छोड़कर अधिकतर जगह औसतन चार से पांच सौ फीट पर पानी मिल रहा है। बोरिंग करने वालों के मुताबिक पिछले वर्ष कांके रोड, पिस्कामोड़, बोड़ेया के कई इलाकों में 800-1000 फीट पर पानी मिल रहा था। जबकि शहर के रातू रोड, पंडरा समेत एक दर्जन से अधिक जगह 500 फीट पर पानी मिल रहा है।
जिले के जलस्रोतों पर एक नजर
रांची जिले में 18 प्रखंड में 19817 तालाब हैं। इनमें सरकारी तालाबों की संख्या 454 और निजी तालाब 12778 हैं। डोभा 6500 हैं। वहीं, प्रमुख नदियां की बात करें तो इनमें स्वर्णरेखा, बादू, बोड़ैया, कोयल, कांची, पोटपोटो जुमार शामिल हैं, जो जलस्रोत के माध्यम भी हैं।
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खोदे गए ज्यादातर डोभा सूख गए
झारखंड में जल संरक्षण की योजनाओं से भी जलस्तर में खासा सुधार नहीं हुआ है। राज्य में जल संरक्षण को लेकर डोभा योजना की शुरुआत की गई थी। लेकिन अधिकतर प्रखंडों में खोदे गए डोभा मार्च में ही सूख गए हैं। इसके अलावा जलाशयों की साफ-सफाई पर भी जिम्मेवारों का ध्यान नहीं है। गेतलसूद डैम से बड़ी आबादी को जलापूर्ति की जाती है, लेकिन यह डैम पूरी तरह जलकुंभी से पटा हुआ है।रांची न्यूज़ डेस्क!!!!