Yemen War Update: हूतियों के खिलाफ यमन सरकार ने खोला मोर्चा, सऊदी अरब भी बड़ी सैन्य कार्रवाई की तैयारी में
यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब के समर्थन वाली यमन सरकार ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने रविवार को कहा कि सरकारी सेना का लक्ष्य पूरे देश में सरकार का नियंत्रण बहाल करना है।
हूतियों का फिलहाल यमन के करीब एक-तिहाई हिस्से पर नियंत्रण बताया जाता है। हालांकि, उनके कब्जे वाले इलाकों में देश की लगभग 80 फीसदी आबादी रहती है। यही वजह है कि कम क्षेत्र पर नियंत्रण होने के बावजूद हूतियों का राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव काफी बड़ा है।
पश्चिमी तट पर हूतियों की बढ़त से बढ़ी चिंता
पिछले 48 घंटों में हूती लड़ाकों ने यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर अपना कब्जा मजबूत किया है। इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति बेहद अहम मानी जाती है। अगर हूती सरकारी इलाकों को तट से अलग करने में कामयाब होते हैं, तो सरकार के लिए इस क्षेत्र पर दोबारा नियंत्रण हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हूतियों ने देश के तीसरे सबसे बड़े शहर ताइज के आसपास भी अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। शहर में बड़ी आबादी के साथ बड़ी संख्या में सरकार समर्थक लड़ाके मौजूद हैं। ऐसे में सैन्य दबाव बढ़ने पर आम नागरिकों के लिए मानवीय संकट गहरा सकता है।
यमनी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद अल-कादी के अनुसार, आसपास की पहाड़ियों पर नियंत्रण हूतियों को मजबूत रक्षात्मक स्थिति देता है। इससे तट की तरफ से होने वाली किसी सैन्य कार्रवाई का मुकाबला करना उनके लिए आसान हो सकता है।
बाब अल-मंदेब पर बढ़ा फोकस
यमन के मौजूदा संघर्ष में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की भूमिका भी अहम होती जा रही है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यूरोप तथा एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
हूतियों ने दक्षिणी लाल सागर में ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों के आसपास भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। ये द्वीप बाब अल-मंदेब से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित बताए जाते हैं।
इस इलाके में हूतियों की सैन्य मौजूदगी बढ़ने से समुद्री जहाजों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। पहले से ही लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में बाब अल-मंदेब पर तनाव बढ़ना वैश्विक व्यापार के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
12 साल से संघर्ष, फिर बढ़ा गृहयुद्ध का खतरा
यमन में सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष करीब 12 साल से जारी है। सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन हासिल रहा है।
2022 में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम हुआ था, जिसके बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई में कमी आई थी। लेकिन हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त ने एक बार फिर बड़े स्तर पर संघर्ष की आशंका पैदा कर दी है।
लगातार युद्ध ने यमन को गंभीर मानवीय संकट में धकेल दिया है। देश का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है और बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है। खाद्य संकट भी गंभीर बना हुआ है। ऐसे में लंबे समय तक सैन्य अभियान चलने पर आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
सऊदी अरब भी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब एक लाख से ज्यादा सैनिकों की तैनाती कर सकता है। अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य बाब अल-मंदेब के आसपास समुद्री मार्ग को सुरक्षित करना हो सकता है।
सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो संभावित विकल्प बताए जा रहे हैं।
पहला विकल्प: बाब अल-मंदेब के आसपास सीमित सैन्य कार्रवाई कर समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने की कोशिश की जाए।
दूसरा विकल्प: यमन के कई रणनीतिक इलाकों में एक साथ अभियान चलाया जाए। इनमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।
लंबी जंग से बढ़ सकता है मानवीय संकट
संभावित अभियान में यमन की सरकारी सेना मुख्य भूमिका निभा सकती है, जबकि सऊदी अरब उसे सैन्य और हवाई समर्थन दे सकता है। अगर संघर्ष का दायरा बढ़ता है तो यमन में पहले से मौजूद विस्थापन, खाद्य संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी और गंभीर हो सकती है।
वहीं बाब अल-मंदेब के आसपास तनाव बढ़ने का असर यमन की सीमाओं से बाहर भी देखने को मिल सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां लंबे समय तक अस्थिरता रहने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

