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अगर भात में शामिल हो गया Pok तो क्या होगा ? जियो पॉलिटिक्स बलाव से इस देश को लगेगा सबसे बड़ा झटका 

अगर भात में शामिल हो गया Pok तो क्या होगा ? जियो पॉलिटिक्स बलाव से इस देश को लगेगा सबसे बड़ा झटका 

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) सिर्फ़ ज़मीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह एशियाई राजनीति की नसों में दौड़ने वाला एक संवेदनशील मुद्दा है। सालों से यह इलाका भारत, पाकिस्तान और चीन की रणनीतियों के बीच फंसा हुआ है। अब सोचिए, अगर भारत किसी भी हालत में PoK को वापस ले लेता है तो क्या होगा? क्या इससे सिर्फ़ नक्शे पर एक लाइन बदलेगी, या यह एशिया में सत्ता के पूरे संतुलन को हिला देगा? इसके नतीजे दूरगामी होंगे।

PoK का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

PoK वह इलाका है जिस पर पाकिस्तान ने 1947-48 से कब्ज़ा कर रखा है, जबकि भारत का कहना है कि यह भारत का अभिन्न अंग है। यह इलाका रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ कई महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रे, नदियाँ और सीमाएँ हैं। इसके अलावा, यह दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाता है।

अगर भारत PoK को वापस ले लेता है तो क्या बदलेगा?

अगर भारत PoK को वापस ले लेता है, तो यह सिर्फ़ भारत-पाकिस्तान सीमा का मामला नहीं होगा। इसका एशिया की भू-राजनीति पर सीधा असर पड़ेगा। सबसे पहले, पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति कमज़ोर हो जाएगी, क्योंकि एक बड़ा और संवेदनशील इलाका उसके हाथ से निकल जाएगा। इसका उसकी अंदरूनी राजनीति और उसकी सेना की स्थिति पर भी गहरा असर पड़ सकता है।

चीन को पहला बड़ा झटका क्यों लगेगा?

PoK का एक बड़ा हिस्सा गिलगित-बाल्टिस्तान के पास है, जिसे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। CPEC चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की रीढ़ है। अगर भारत इस इलाके पर नियंत्रण कर लेता है, तो CPEC की सुरक्षा और भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इससे चीन की निवेश रणनीति और पश्चिम एशिया तक उसकी पहुँच प्रभावित हो सकती है।

यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका क्यों होगा?

PoK को खोना पाकिस्तान के लिए सिर्फ़ ज़मीन का नुकसान नहीं होगा, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक झटका भी होगा। कश्मीर मुद्दा हमेशा से पाकिस्तानी राजनीति के केंद्र में रहा है। PoK पर नियंत्रण खोने से सरकार, सेना और आम जनता पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ सकता है।

अमेरिका और यूरोप की संभावित भूमिका

इस तरह के बड़े बदलाव की स्थिति में, अमेरिका और यूरोपीय देश निस्संदेह शांति और संयम बनाए रखने की अपील करेंगे। उनका ध्यान इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर होगा। हालांकि, चूंकि भारत को एक ज़िम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के तौर पर देखा जाता है, इसलिए पश्चिमी देश सीधे टकराव में पड़ने के बजाय स्थिति को संतुलित करने की कोशिश करेंगे।

मध्य पूर्व और अन्य एशियाई देशों की प्रतिक्रिया

कई मध्य पूर्वी देशों के भारत के साथ मज़बूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। उनकी अर्थव्यवस्थाएं और ऊर्जा सहयोग भारत से जुड़े हुए हैं। इसलिए, वे इस मुद्दे पर बहुत आक्रामक रुख अपनाने के बजाय संतुलित प्रतिक्रिया देंगे। अन्य दक्षिण एशियाई देश भी स्थिति पर करीब से नज़र रखेंगे।

सुरक्षा और आतंकवाद पर असर

अगर पाकिस्तान के कब्ज़े वाला कश्मीर (PoK) भारत के कंट्रोल में आता है, तो इससे सीमा पार आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर पड़ सकता है। इसे भारत की आंतरिक सुरक्षा के मामले में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा। हालांकि, इससे क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ सकता है, जिसे कूटनीति के ज़रिए मैनेज करने की ज़रूरत होगी।

एशियाई भू-राजनीति में संभावित बदलाव

कुल मिलाकर, PoK की स्थिति में बदलाव से एशिया में शक्ति संतुलन पर असर पड़ेगा। भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ सकता है, चीन और पाकिस्तान को अपनी रणनीतियों पर फिर से सोचना पड़ सकता है, और वैश्विक शक्तियां इस क्षेत्र को ज़्यादा गंभीरता से देखना शुरू कर सकती हैं।

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