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वीडियो में देखें ईरान-अमेरिका-इजराइल जंग से लेबनान में 8 लाख लोग बेघर, दुबई के पर्यटन पर भी पड़ा असर

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अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का आज 16वां दिन है। इस संघर्ष का असर अब केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में इसके गंभीर परिणाम दिखाई देने लगे हैं। इजराइल जहां लगातार लेबनान पर हमले कर रहा है, वहीं ईरान के साथ बढ़ते तनाव का असर खाड़ी देशों के पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइली हमलों के कारण लेबनान में बड़े पैमाने पर लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब तक करीब 8 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। इनमें 2 लाख से अधिक बच्चे भी शामिल हैं। लगातार हो रहे हमलों और असुरक्षा के माहौल के कारण हजारों परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं।

मानवीय संगठनों का कहना है कि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। कई इलाकों में स्कूल, अस्पताल और बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष जल्द नहीं थमा तो यह एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले सकता है।

युद्ध का असर खाड़ी देशों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आमतौर पर पर्यटकों से गुलजार रहने वाला Dubai इस बार असामान्य रूप से शांत दिखाई दे रहा है। पर्यटन के व्यस्त मौसम में भी यहां कई लोकप्रिय स्थानों पर अपेक्षा से काफी कम पर्यटक पहुंच रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ईरान की ओर से संयुक्त अरब अमीरात के कुछ इलाकों को निशाना बनाए जाने के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका असर देश की उस छवि पर पड़ा है जिसके तहत यूएई को दुनिया के सबसे सुरक्षित पर्यटन स्थलों में गिना जाता रहा है।

दुबई के कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर इस बदलाव को साफ देखा जा सकता है। Al Seef Waterfront Market के आसपास का इलाका आम दिनों में पर्यटकों और खरीदारों से भरा रहता है, लेकिन इन दिनों वहां अपेक्षाकृत सन्नाटा नजर आ रहा है।

इसी तरह शहर के प्रतिष्ठित होटल Burj Al Arab के आसपास स्थित समुद्र तटों पर भी पर्यटकों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम देखी जा रही है। कई होटल और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण पर्यटक अपनी यात्राएं टाल रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर केवल सुरक्षा और राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो खाड़ी देशों के पर्यटन उद्योग को बड़ा नुकसान हो सकता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस युद्ध पर टिकी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है, ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके और बढ़ते मानवीय संकट को रोका जा सके।

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