ChatGPT से लिखा गया था पूरा उपन्यास? कनाडाई लेखक पर AI इस्तेमाल का आरोप, बड़े साहित्यिक पुरस्कार से बाहर हुई किताब
साहित्य की दुनिया में इस वक्त AI को लेकर बड़ा विवाद छिड़ा हुआ है। कनाडाई-हाईटियन लेखक थेलीसन ओरेलियन (Thélyson Orélien) के चर्चित उपन्यास C’était ça ou mourir यानी ‘It Was That or Die’ पर आरोप लगा है कि इसे लिखने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया।
मामला इतना बढ़ गया कि फ्रांस के प्रतिष्ठित Prix Goncourt की लॉन्गलिस्ट से इस उपन्यास को हटा दिया गया। हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि लेखक ने AI से उपन्यास लिखने के आरोपों से इनकार किया है।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद
रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद की शुरुआत 21 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक गुमनाम अकाउंट की पोस्ट से हुई। इस अकाउंट ने दावा किया कि AI डिटेक्शन टूल Pangram के विश्लेषण में उपन्यास का बड़ा हिस्सा AI से तैयार किया गया पाया गया।
इसके बाद देखते ही देखते यह मामला फ्रांस के साहित्यिक जगत में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, कहानी इतनी सीधी नहीं है। कुछ अन्य AI डिटेक्शन टूल्स के नतीजे इससे अलग बताए गए हैं और विशेषज्ञों ने ऐसे टूल्स की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं।
लेखक ने आरोपों को किया खारिज
38 वर्षीय थेलीसन ओरेलियन ने AI से किताब लिखने के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा है कि वह यह साबित करेंगे कि किताब उन्होंने खुद लिखी है।
उनका उपन्यास एक ऐसे हाईटियन प्रवासी की कहानी बताता है, जो अपने देश में गैंग हिंसा के बीच अपना घर छोड़ता है और कई देशों से गुजरते हुए कनाडा पहुंचता है। किताब को साहित्यिक जगत में काफी सराहना मिली और इसकी 35 हजार से ज्यादा प्रतियां बिकने की रिपोर्ट है। इसके अनुवाद अधिकार भी 20 से ज्यादा देशों में बेचे गए हैं।
Goncourt पुरस्कार से हटाई गई किताब
AI विवाद के बाद Académie Goncourt ने उपन्यास को अपनी लॉन्गलिस्ट से हटा दिया। अकादमी ने कहा कि उसका फैसला पुरस्कार और अकादमी की साहित्यिक अखंडता को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। इसी दौरान लेखक के पुराने काम को लेकर अलग से प्लेजरिज्म के आरोप भी सामने आए।
वहीं, लेखक के कनाडाई प्रकाशक ने भी किताब के प्रमोशन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। हालांकि, उपन्यास अभी दूसरे प्रमुख फ्रांसीसी साहित्यिक पुरस्कारों की दौड़ में बना हुआ है।
असली सवाल—क्या AI डिटेक्टर पर भरोसा किया जा सकता है?
इस पूरे विवाद ने साहित्य जगत के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर कोई AI डिटेक्टर किसी किताब को AI से लिखा हुआ बताता है, तो क्या उसे अंतिम सबूत माना जा सकता है?
विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि अलग-अलग AI डिटेक्शन टूल्स एक ही टेक्स्ट को लेकर अलग-अलग नतीजे दे सकते हैं। ऐसे में सिर्फ किसी एक डिटेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर लेखक के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालना विवाद का विषय बन गया है।
यह मामला अब सिर्फ एक लेखक या एक किताब तक सीमित नहीं रह गया है। AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच साहित्य की दुनिया में यह बहस तेज हो रही है कि किताब लिखने में AI की कितनी मदद स्वीकार्य होनी चाहिए, लेखक को इसका खुलासा कब करना चाहिए और किसी पुरस्कार में AI की भूमिका को लेकर नियम क्या होने चाहिए।
यानी एक तरफ AI लेखन की दुनिया को बदल रहा है, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि रचनात्मक काम में इंसान और मशीन की सीमा आखिर तय कैसे होगी?

