Samachar Nama
×

Viral Slogan: फ्रांस के Gen-Z प्रदर्शनों में क्यों गूंज रहा ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’? जानें इसका मतलब

Viral Slogan: फ्रांस के Gen-Z प्रदर्शनों में क्यों गूंज रहा ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’? जानें इसका मतलब

फ्रांस में छात्र आंदोलनों के बीच एक अजीबोगरीब वाक्य सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’ नाम का यह नारा Gen-Z प्रदर्शनकारियों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। युवा कथित तौर पर इसका इस्तेमाल पुलिस और उन लोगों का मजाक उड़ाने के लिए कर रहे हैं, जिन पर आंदोलन के अंदर की जानकारी जुटाने की कोशिश करने का संदेह है। इस वाक्य की खास बात इसका अलग-अलग भाषाओं से बना होना और इसका असामान्य अंदाज है।

क्या है ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’ का मतलब?

इस वाक्य के दो हिस्से हैं। ‘बिस्मिल्लाह’ अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ‘अल्लाह के नाम पर’ होता है। वहीं, फ्रेंच वाक्यांश ‘C'est les ténèbres’ का मोटे तौर पर अर्थ ‘यह अंधकार है’ बताया जा रहा है।

हालांकि, दोनों हिस्सों को जोड़कर बना यह वाक्य सामान्य फ्रेंच अभिव्यक्ति नहीं है। इसकी अटपटी बनावट और असामान्य शब्दों के मेल ने इसे मजाक और इंटरनेट मीम्स का विषय बना दिया। इसकी लोकप्रियता का कारण कोई स्पष्ट संदेश देने के बजाय इसका विचित्र अंदाज और इससे जुड़ा पूरा घटनाक्रम बताया जा रहा है।

भारत में भी जुलाई में छात्र आंदोलन के दौरान ‘वास्तेगुना हुइंया’ जैसा स्लैंग चर्चा में आया था। इसे वायरल अंग्रेजी वाक्य ‘Can I get a hoya?’ के बिगड़े हुए रूप के तौर पर बताया गया था।

Snapchat से कैसे वायरल हुआ यह वाक्य?

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वाक्य का प्रसार Snapchat पर भेजे गए संदेशों से शुरू हुआ। बताया गया कि एक व्यक्ति ने छात्र प्रदर्शनों के आयोजकों के निजी चैट समूहों तक पहुंचने के लिए कुछ लोगों को संदेश भेजे। इनमें ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’ के साथ आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ करने जैसी बात भी लिखी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, संदेश भेजने वाले ने अलग-अलग नामों से कई प्रोफाइल बनाई थीं। कुछ प्रोफाइल पर अल्जीरिया के झंडे वाले इमोजी भी लगाए गए थे। संदेशों की भाषा और अंदाज कुछ युवाओं को इतने अजीब लगे कि उन्होंने उनके स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिए। इसके बाद यह वाक्य तेजी से चर्चा में आ गया।

युवाओं को पुलिस पर क्यों हुआ शक?

कुछ प्रदर्शनकारियों को संदेह हुआ कि संदेश भेजने वाले लोग पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े हो सकते हैं। उन्हें लगा कि आंदोलन के भीतर की जानकारी जुटाने के लिए फर्जी पहचान के जरिए युवाओं से संपर्क किया जा रहा है। हालांकि, केवल संदेशों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि उन्हें पुलिस ने ही भेजा था।

इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने इसी वाक्य को पुलिस या कथित निगरानी की कोशिशों पर तंज कसने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इस तरह एक अजीब-सा संदेश विरोध प्रदर्शनों की ऑनलाइन संस्कृति का हिस्सा बन गया।

फ्रांस से बेल्जियम और जर्मनी तक चर्चा

रिपोर्टों के मुताबिक, इस नारे की चर्चा फ्रांस के बाहर भी पहुंची और बेल्जियम तथा जर्मनी में कुछ विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी इसका इस्तेमाल किया गया। फ्रांस के एक छात्र संगठन की प्रवक्ता सबरीन खरबाच ने कथित तौर पर कहा कि युवा सामान्य बातचीत में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करते।

इस वाक्य को लेकर युवाओं की प्रतिक्रिया केवल उसके अर्थ तक सीमित नहीं रही। इसकी अटपटी भाषा ने इसे एक ऐसे मजाक में बदल दिया, जिसके जरिए प्रदर्शनकारी आंदोलन के अंदर घुसपैठ या निगरानी की आशंकाओं पर कटाक्ष कर रहे थे।

किन मांगों को लेकर शुरू हुआ था छात्र आंदोलन?

फ्रांस में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के पीछे स्कूलों की खराब हालत, शिक्षकों की कमी, कक्षाओं में विद्यार्थियों की अधिक संख्या और पढ़ाई के दबाव जैसे मुद्दे बताए गए। प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आने की खबरें थीं।

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, कई स्कूलों को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। आंदोलन के साथ मजदूर संगठनों तथा अन्य समूहों की भागीदारी और महंगाई से जुड़े विरोध की खबरें भी सामने आईं।

‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’ की कहानी दिखाती है कि सोशल मीडिया पर किसी अजीब वाक्य का प्रसार कैसे एक बड़े राजनीतिक या सामाजिक घटनाक्रम से जुड़ सकता है। यहां इसकी लोकप्रियता का आधार शाब्दिक अर्थ से ज्यादा वह संदेह, व्यंग्य और ऑनलाइन संस्कृति है, जिसने इसे प्रदर्शनकारियों के बीच पहचान दिलाई।

Share this story

Tags