अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, चौथे दिन भी अमेरिकी हमले जारी; ईरान का पलटवार, फुटेज में देंखे ट्रम्प ने दी नई चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार रात अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, करीब सात घंटे तक चले ऑपरेशन में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित ईरानी मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, नौसैनिक संसाधनों तथा तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित खतरों को कम करने के उद्देश्य से की गई। वहीं, ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए जवाबी कार्रवाई का दावा किया है।
ईरान का पलटवार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जवाबी अभियान शुरू करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं।IRGC के मुताबिक, बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट बेस और जॉर्डन के अजराक एयरबेस को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान या किसी हताहत की स्वतंत्र पुष्टि अभी त नहीं हो सकी है। अमेरिकी प्रशासन ने भी इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
ट्रम्प की कड़ी चेतावनी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान बातचीत और समझौते की दिशा में आगे नहीं बढ़ता, तो अमेरिका अगले चरण में बिजलीघरों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है।ट्रम्प के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ा, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
ईरान बोला- दबाव में नहीं झुकेंगे
दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। तेहरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उसकी रणनीति जारी रहेगी और वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर डाल सकता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में टकराव कम होने के बजाय और बढ़ने की आशंका दिखाई दे रही है।

