अमेरिका और ईरान सीजफायर समझौते के करीब, वीडियो में देंखे परमाणु वार्ता में बड़ी प्रगति के संकेत
United States और Iran के बीच लंबे समय से जारी तनाव और टकराव के बाद अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने और परमाणु कार्यक्रम को लेकर नए समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले 48 घंटों के भीतर ईरान सीजफायर पर सहमति दे सकता है।अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक 14 सूत्रीय (14-पॉइंट) समझौता तैयार किया गया है, हालांकि इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। इसके बावजूद कूटनीतिक स्तर पर बातचीत पहले की तुलना में काफी आगे बढ़ चुकी है और दोनों पक्ष कई अहम मुद्दों पर सहमति के करीब पहुंचते दिख रहे हैं।
ड्राफ्ट समझौते के अनुसार ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम (न्यूक्लियर प्रोग्राम) को एक निर्धारित अवधि के लिए आंशिक या पूर्ण रूप से रोक सकता है। इसके बदले में अमेरिका धीरे-धीरे ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को कम करने पर सहमत हो सकता है। इसके साथ ही ईरान के अरबों डॉलर के फ्रीज किए गए धन को भी चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।इसके अलावा, दोनों देशों के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लगाए गए प्रतिबंधों और सैन्य दबाव को कम करने पर भी सहमति बनने की चर्चा है। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि इस समझौते में सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम रोकने की अवधि को लेकर बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार ईरान की ओर से 5 साल की अवधि का प्रस्ताव दिया गया है, जबकि अमेरिका इससे कहीं लंबी अवधि चाहता था। पहले अमेरिका की मांग लगभग 20 वर्षों तक प्रतिबंध या रोक की थी, लेकिन अब बातचीत के दौरान एक मध्य मार्ग निकालने की कोशिश हो रही है।नए प्रस्ताव के तहत 12 से 15 वर्षों की अवधि पर सहमति बनने की संभावना पर चर्चा चल रही है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मध्यस्थ अवधि स्वीकार कर ली जाती है, तो यह समझौता दोनों देशों के बीच दशकों में सबसे महत्वपूर्ण डील साबित हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों के अनुसार, यह बातचीत केवल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा।फिलहाल दोनों देशों की सरकारों की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कूटनीतिक संकेतों से यह साफ है कि वार्ता निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। आने वाले कुछ दिन इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि किसी भी समय सीजफायर और समझौते की औपचारिक घोषणा हो सकती है।

