अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की वजह से अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील, वीडियो में देखें यूएस सांसद की ऑडियो रिकॉर्डिंग लीक
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर एक बड़ा राजनीतिक खुलासा सामने आया है। अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने दावा किया है कि इस अहम व्यापार समझौते के पूरा न हो पाने की एक बड़ी वजह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रहे। यह दावा एक लीक ऑडियो रिकॉर्डिंग के जरिए सामने आया है, जिसे अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सिओस (Axios) ने प्रकाशित किया है।
यह ऑडियो रिकॉर्डिंग कथित तौर पर 2025 के मध्य की है, जब टेड क्रूज ने दानदाताओं के साथ निजी बैठकों के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा की थी। रिकॉर्डिंग को सीक्रेट तरीके से किया गया था, जो अब सार्वजनिक हो गई है। इसमें क्रूज व्हाइट हाउस के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीति और मतभेदों की ओर इशारा करते हुए भारत के साथ ट्रेड डील में हो रही देरी के कारणों को उजागर करते हैं।
ऑडियो में टेड क्रूज यह स्वीकार करते हुए सुने जा सकते हैं कि भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर व्हाइट हाउस के अंदर ही विरोध मौजूद था। जब दानदाताओं ने उनसे सवाल किया कि इस डील में सबसे ज्यादा अड़चन कौन डाल रहा है, तो क्रूज ने साफ तौर पर व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कभी-कभी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नाम लिया।
क्रूज के मुताबिक, जेडी वेंस भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर विशेष रूप से सख्त रुख अपनाए हुए थे। उनका मानना था कि अमेरिका को इस समझौते से अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा, जबकि भारत को ज्यादा फायदा हो सकता है। यही वजह रही कि वेंस ने इस डील को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखाई। इसके अलावा ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो भी लंबे समय से संरक्षणवादी नीतियों के समर्थक रहे हैं, जिससे व्यापार वार्ताओं पर असर पड़ा।
रिकॉर्डिंग में टेड क्रूज यह भी कहते हैं कि कई मौकों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अनिश्चित नीति और अंतिम समय में फैसले बदलने की प्रवृत्ति के कारण भी डील आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, क्रूज ने यह स्पष्ट किया कि ट्रम्प हमेशा इस देरी के लिए जिम्मेदार नहीं थे, लेकिन कुछ मामलों में उनकी भूमिका भी रही।
इस लीक ऑडियो के सामने आने के बाद अमेरिकी राजनीति में हलचल मच गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर रिपब्लिकन नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं व्हाइट हाउस की ओर से अब तक इस रिकॉर्डिंग की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा था। इस समझौते से टेक्नोलॉजी, रक्षा, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद थी। हालांकि, व्हाइट हाउस के भीतर मतभेद और राजनीतिक खींचतान के चलते यह डील फिलहाल अधर में लटकी हुई नजर आ रही है।
इस खुलासे के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या आने वाले समय में भारत-अमेरिका व्यापार संबंध नई दिशा ले पाएंगे या फिर आंतरिक अमेरिकी राजनीति इन प्रयासों में बाधा बनी रहेगी।

