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ईरान पर अमेरिका का दबाव बढ़ा, एक्सक्लुसीव फुटेज में देखें ट्रम्प का दावा—एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर रवाना

ईरान पर अमेरिका का दबाव बढ़ा, एक्सक्लुसीव फुटेज में देखें ट्रम्प का दावा—एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर रवाना

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के तेज होने के बीच अमेरिका ने तेहरान पर दबाव और बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति को और सख्त कर रहा है। इस कड़ी में अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

मंगलवार को दिए गए एक भाषण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका का एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि ट्रम्प ने इस नौसैनिक बेड़े के बारे में ज्यादा तकनीकी या रणनीतिक जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने कहा कि यह कदम क्षेत्र में अमेरिका के हितों की रक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया जा रहा है। ट्रम्प ने यह भी दोहराया कि अमेरिका ईरान के साथ एक नए और बेहतर समझौते की उम्मीद रखता है।

ट्रम्प ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है ताकि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कड़े प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि मौजूदा हालात में ईरान नए समझौते पर सहमत होने के लिए मजबूर हो सकता है।

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने इस तरह का बयान दिया हो। करीब एक हफ्ते पहले भी उन्होंने कहा था कि एक बड़ा अमेरिकी सैन्य बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। उस समय भी उनके बयान को मिडिल ईस्ट में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा गया था। अब एक बार फिर इस तरह के बयान से यह साफ संकेत मिल रहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

इस बीच बीबीसी फारसी की रिपोर्ट ने इस तनाव को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी युद्धपोत ‘USS अब्राहम लिंकन’ मिडिल ईस्ट में पहुंच चुका है। USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर युद्धपोतों में गिना जाता है। इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर दर्जनों लड़ाकू विमान तैनात किए जा सकते हैं और यह लंबी दूरी तक सैन्य अभियान चलाने में सक्षम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि USS अब्राहम लिंकन की तैनाती अमेरिका की रणनीतिक चेतावनी का हिस्सा है। इससे न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिका का सैन्य संदेश साफ हो जाता है। वहीं ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और आंतरिक अस्थिरता के बीच इस सैन्य दबाव को तेहरान के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के रिश्तों में और तल्खी आ सकती है। हालांकि ट्रम्प के बयानों में सैन्य सख्ती के साथ-साथ बातचीत की उम्मीद भी झलकती है। अब यह देखना अहम होगा कि ईरान इस दबाव के बीच किस तरह की प्रतिक्रिया देता है और क्या वाकई कोई नया समझौता संभव हो पाता है या नहीं।

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