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US Midterm Elections 2026: ट्रंप की लोकप्रियता से लेकर महंगाई तक, क्यों अहम है अमेरिका का मिड-टर्म चुनाव?
 

US Midterm Elections 2026: ट्रंप की लोकप्रियता से लेकर महंगाई तक, क्यों अहम है अमेरिका का मिड-टर्म चुनाव?

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिड-टर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस चुनाव में ट्रंप खुद उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन नतीजों का सीधा असर उनके राजनीतिक एजेंडे और अगले कार्यकाल की नीतियों को लागू करने की क्षमता पर पड़ सकता है।
मिड-टर्म चुनाव के जरिए अमेरिकी मतदाता कांग्रेस के दोनों सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बरकरार रख पाएगी।
ट्रंप भी अपने समर्थकों से पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने लोगों से यहां तक कहा है कि वे इस तरह वोट करें जैसे बैलेट पेपर पर उनका नाम मौजूद हो।


हाउस में बहुमत बचाना सबसे बड़ी चुनौती
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। बहुमत के लिए किसी पार्टी को कम से कम 218 सीटों की जरूरत होती है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास 218 सीटें हैं, यानी बहुमत बेहद मामूली अंतर से है।
ऐसे में अगर रिपब्लिकन कुछ सीटें भी गंवाती है तो सदन में उसका नियंत्रण खत्म हो सकता है। यही वजह है कि हाउस का चुनाव ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण मोर्चों में से एक बन गया है।


सीनेट में कितनी सीटें जरूरी?
सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं। 2026 के मिड-टर्म चुनाव में इनमें से 35 सीटों पर मतदान होना है। सामान्य स्थिति में बहुमत के लिए 51 सीटों का आंकड़ा जरूरी माना जाता है।
हालांकि, अगर दोनों पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा 50-50 हो जाता है, तो उपराष्ट्रपति का निर्णायक वोट कई मामलों में बहुमत तय कर सकता है। इसलिए सीनेट में रिपब्लिकन के लिए सीटों का मामूली बदलाव भी काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
क्या है ट्रंप का $5,000 वाला 'डिविडेंड'?
मिड-टर्म चुनाव से पहले ट्रंप की ओर से किया गया एक वित्तीय वादा भी चर्चा में है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के दोनों सदनों में बहुमत बरकरार रखने की स्थिति में अमेरिकी वयस्क नागरिकों को $5,000 का 'ट्रंप डिविडेंड' देने की बात कही है।
इस वादे का संभावित वित्तीय बोझ काफी बड़ा होगा। अमेरिका में करीब 27 करोड़ वयस्क नागरिक माने जाएं तो सभी को $5,000 देने पर लगभग 1.35 ट्रिलियन डॉलर की राशि की जरूरत पड़ सकती है।
ट्रंप का कहना है कि इस राशि की व्यवस्था अमीर अमेरिकियों पर नया टैक्स लगाने के बजाय दूसरे देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए टैरिफ से की जा सकती है।


मिड-टर्म चुनाव ट्रंप के लिए आसान नहीं
अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में मिड-टर्म चुनाव अक्सर राष्ट्रपति की पार्टी के लिए मुश्किल साबित होते रहे हैं। राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच होने वाले इन चुनावों में मतदाता कई बार सरकार के कामकाज के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं।
ट्रंप के लिए उनकी अप्रूवल रेटिंग भी एक चुनौती हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी औसत अप्रूवल रेटिंग करीब 38.5 प्रतिशत बताई गई है। आम तौर पर 50 प्रतिशत से कम अप्रूवल रेटिंग वाले राष्ट्रपतियों की पार्टियों को मिड-टर्म चुनाव में नुकसान का सामना करना पड़ा है।


ईरान और महंगाई भी बन सकते हैं चुनावी मुद्दे
मिड-टर्म चुनाव में केवल घरेलू राजनीति ही नहीं, बल्कि विदेश नीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ट्रंप प्रशासन को ईरान युद्ध, तेल की कीमतों और महंगाई जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर अमेरिकी परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है। वहीं लगातार महंगाई लोगों की रोजमर्रा की खरीदारी और खर्च को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मतदाता कांग्रेस में किस पार्टी को समर्थन देते हैं, यह आर्थिक हालात और सरकार के प्रति उनके नजरिए से भी प्रभावित हो सकता है।


ट्रंप के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ये चुनाव?
अगर रिपब्लिकन पार्टी हाउस और सीनेट दोनों में बहुमत बनाए रखने में सफल रहती है तो ट्रंप के लिए अपने राजनीतिक और आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है। वहीं अगर पार्टी बहुमत गंवा देती है तो कानून पास कराने और नीतियों को लागू करने में उन्हें विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए 3 नवंबर 2026 का मिड-टर्म चुनाव सिर्फ कांग्रेस की सीटों का मुकाबला नहीं होगा, बल्कि इसे ट्रंप प्रशासन के कामकाज पर जनता के एक बड़े राजनीतिक फैसले के तौर पर भी देखा जा रहा है।
 

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