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US Midterm Elections 2026: इमिग्रेशन से लेकर महंगाई तक, ट्रंप के सामने कई बड़े मुद्दे; भारतीय समुदाय पर भी असर
 

US Midterm Elections 2026: इमिग्रेशन से लेकर महंगाई तक, ट्रंप के सामने कई बड़े मुद्दे; भारतीय समुदाय पर भी असर

अमेरिका में नवंबर 2026 में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले इमिग्रेशन, महंगाई और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे अमेरिकी राजनीति में प्रमुख बने हुए हैं। इन मुद्दों का असर भारतीय मूल के लोगों और दूसरे प्रवासी समुदायों पर भी चर्चा में है। हालिया सर्वेक्षणों में अमेरिकी मतदाताओं के बीच इमिग्रेशन को महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बताया गया है, हालांकि अर्थव्यवस्था और महंगाई को इससे भी ज्यादा लोगों ने प्राथमिकता दी है। जुलाई के एक Ipsos सर्वे में 54% पंजीकृत मतदाताओं ने अर्थव्यवस्था और बढ़ती कीमतों को अपने वोट के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में बताया था, जबकि 28% ने इमिग्रेशन को महत्वपूर्ण बताया।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच इमिग्रेशन को लेकर चिंता
अमेरिका में इमिग्रेशन कानूनों के सख्त होते रुख के बीच एशियन अमेरिकन और पैसिफिक आइलैंडर यानी AAPI समुदाय में भी चिंता सामने आई है। AAPI Data और AP-NORC के सर्वे में करीब 6 में से 10 AAPI वयस्कों ने कहा कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में इमिग्रेशन और बॉर्डर सिक्योरिटी के मामले में नीतियों का असर उनके अनुसार नुकसान की दिशा में रहा है। करीब दो-तिहाई AAPI वयस्कों ने अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को डिपोर्ट करने के मौजूदा तरीके को जरूरत से ज्यादा सख्त बताया।
भारतीय समुदाय के बीच भी इमिग्रेशन कार्रवाई और ICE की गतिविधियों को लेकर अलग-अलग अनुभव सामने आए हैं। हालांकि, भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के मामलों में नवंबर तक 58 हजार पहुंचने या 30% बढ़ोतरी जैसे आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि विश्वसनीय सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो सकी है, इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं कहा जा सकता।
ICE की कार्रवाई भी बनी चर्चा का विषय
अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी ICE की कार्रवाई को लेकर भी देश में बहस जारी है। AAPI Data/AP-NORC के मार्च 2026 सर्वे में 73% AAPI वयस्कों ने ICE के प्रति प्रतिकूल राय जाहिर की थी, जबकि सामान्य अमेरिकी आबादी में यह आंकड़ा 60% था।
इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रंप की इमिग्रेशन नीति को लेकर राय बंटी हुई है। AP-NORC के एक सर्वे में सिर्फ 39% अमेरिकी वयस्कों ने ट्रंप के इमिग्रेशन संबंधी प्रदर्शन को मंजूरी दी, जबकि रिपब्लिकन मतदाताओं में करीब 80% ने इसे मंजूरी दी।
महंगाई भी चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा
मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में महंगाई और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी शामिल हैं। Ipsos के जुलाई सर्वे में 54% पंजीकृत मतदाताओं ने अर्थव्यवस्था और ऊंची कीमतों को अपने वोट को प्रभावित करने वाला प्रमुख मुद्दा बताया था। वहीं, 65% लोगों ने कहा कि वे ट्रंप के आर्थिक प्रबंधन से असंतुष्ट हैं।
21 सितंबर को जारी Reuters/Ipsos सर्वे में ट्रंप की कुल अप्रूवल रेटिंग 32% दर्ज हुई। इसी सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को कांग्रेस के लिए 43% और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 35% का समर्थन मिला। यह एक राष्ट्रीय मतदाता सर्वे का आंकड़ा है और इसे किसी विशेष सीट या चुनाव परिणाम की भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जा सकता।

ईरान युद्ध का भी चुनाव पर असर
ईरान के साथ जारी युद्ध भी अमेरिकी राजनीति में अहम मुद्दा बना हुआ है। Ipsos के जुलाई सर्वे में 20% पंजीकृत मतदाताओं ने ईरान, इजरायल और विदेश नीति को अपने वोट के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बताया था। इसके अलावा युद्ध के कारण तेल और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने आर्थिक चिंता को भी बढ़ाया है।
मिडटर्म चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इसमें कांग्रेस के दोनों सदनों के लिए चुनाव के साथ कई राज्यों और स्थानीय स्तर के पदों के लिए भी मतदान होता है।

कांग्रेस में किसी पार्टी के पास बहुमत होने से कानून बनाने, बजट और प्रशासनिक नीतियों से जुड़े फैसलों पर उसका प्रभाव बढ़ता है। इसलिए मिडटर्म चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति के कार्यकाल के अगले दो वर्षों के लिए राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं।
इस बार इमिग्रेशन, अर्थव्यवस्था, महंगाई, ईरान युद्ध और ICE की कार्रवाई जैसे मुद्दों पर मतदाताओं की राय चुनावी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। भारतीय-अमेरिकी और व्यापक AAPI समुदाय के लिए इमिग्रेशन नीतियां, परिवारों की स्थिति और रोजगार से जुड़े सवाल भी चर्चा में हैं।
 

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