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US Midterm Election: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के दौरान मतदान मशीनों में खराबी, बाढ़ से 21 पोलिंग बूथ शिफ्ट

US Midterm Election: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के दौरान मतदान मशीनों में खराबी, बाढ़ से 21 पोलिंग बूथ शिफ्ट

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव में कई राज्यों से मतदान प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों की खबरें सामने आई हैं। न्यूयॉर्क के वेस्टचेस्टर जिले में कुछ वोटिंग मशीनें बैलट पेपर स्कैन नहीं कर पा रही हैं। वहीं, फ्लोरिडा में बाढ़ के कारण 21 मतदान केंद्रों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा है।

भारतीय समय के अनुसार मंगलवार शाम 4:30 बजे मतदान शुरू हुआ, जो बुधवार सुबह 11:30 बजे तक जारी रहेगा। चुनाव के बीच कुछ राज्यों के अधिकारियों ने मतदान प्रक्रिया में संघीय प्रशासन के संभावित हस्तक्षेप को लेकर भी चिंता जताई है।

वोटिंग प्रक्रिया में दखल की आशंका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ राज्य अधिकारियों को आशंका है कि ट्रम्प प्रशासन मतदान और मतगणना की प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकता है। प्रशासन की ओर से गैर-अमेरिकी नागरिकों के मतदान करने की आशंका जताई गई है। इसी बीच कुछ राज्यों के मतदान केंद्रों पर सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर भी चर्चा हो रही है।

रिपोर्ट्स में यह भी आशंका जताई गई है कि वोटिंग मशीनों की जांच के नाम पर मतदान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इन आशंकाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों के दावों और वास्तविक घटनाओं के बीच अंतर समझना जरूरी है।

अमेरिकी संविधान के अनुसार चुनाव कराने और मतदान प्रक्रिया की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों की होती है। राष्ट्रपति के पास सीधे चुनाव संचालित करने का अधिकार नहीं है।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा सीनेट की 100 सीटों में से 35 सीटों के लिए भी चुनाव कराया जा रहा है।

फिलहाल डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बहुमत है। ऐसे में इन चुनावों के नतीजे संसद में राजनीतिक दलों की स्थिति और राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल के दौरान विधायी कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।

मिडटर्म चुनाव क्यों हैं अहम?

मिडटर्म चुनाव के नतीजों से यह तय होगा कि संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। इसके आधार पर कानून बनाने, बजट पारित करने और सरकार की नीतियों से जुड़े फैसलों में राजनीतिक दलों की भूमिका प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि इन चुनावों पर अमेरिका के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।

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