मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहरा गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच नए सैन्य हमलों और ड्रोन कार्रवाई की खबरों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ताजा घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच संभावित शांति वार्ता पर भी खतरा बढ़ गया है। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार अमेरिका ने ईरान समर्थित ठिकानों और संदिग्ध सैन्य गतिविधियों को निशाना बनाते हुए नई कार्रवाई की है। वहीं ईरान की ओर से दावा किया गया है कि उसके सुरक्षा बलों ने कई ड्रोन मार गिराए हैं। हालांकि दोनों पक्षों के दावों को लेकर आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी सामने आई है, लेकिन हालात को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और संभावित बातचीत की कोशिशें चल रही थीं। लेकिन ताजा सैन्य घटनाओं ने इन प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। यदि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है।
अमेरिका लंबे समय से ईरान पर क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने और सशस्त्र समूहों को समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय हितों में लगातार हस्तक्षेप कर रहा है। इसी तनातनी के बीच ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
ताजा घटनाक्रम के बाद तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और गहराता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा समुद्री मार्गों और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है।
संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है कि विवाद को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाया जाए। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए शांति वार्ता की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच संबंध पहले से ही बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों देशों में लंबे समय से टकराव जारी है। ऐसे में किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।
उधर मध्य पूर्व के कई देशों ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। संवेदनशील इलाकों में सैन्य निगरानी तेज कर दी गई है और संभावित खतरे को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है।
फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि तनाव कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।

