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US-Iran War Tension: ईरान की चेतावनी- हमले के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी भी देश को माना जा सकता है वैध लक्ष्य

US-Iran War Tension: ईरान की चेतावनी- हमले के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी भी देश को माना जा सकता है वैध लक्ष्य

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने बड़ा बयान जारी किया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी देश अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए करने देता है तो उसे जवाबी कार्रवाई के लिए वैध लक्ष्य माना जा सकता है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने पड़ोसी देशों को इस मामले में सतर्क रहने को कहा है।

ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किसी भी हमले का स्रोत या लॉन्च प्वाइंट उसकी जवाबी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। तेहरान ने आरोप लगाया कि कुछ देश अपनी सुविधाओं के जरिए अमेरिका या अन्य सहयोगी देशों को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने में मदद कर सकते हैं।

ईरान ने क्षेत्रीय देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी जमीन और सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किसी भी आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं होने देना चाहिए। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए जवाबी कदम उठाने का अधिकार रखता है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ा खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य टकराव के बाद पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। दोनों देशों के बीच हमलों और जवाबी हमलों के चलते खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है।

ईरान ने पहले भी कहा है कि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल ठिकाने उसकी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि वे क्षेत्रीय सुरक्षा और अपने सैन्य हितों की रक्षा के लिए कदम उठा रहे हैं।

खाड़ी देशों पर बढ़ा दबाव

ईरान की चेतावनी के बाद खाड़ी क्षेत्र के उन देशों पर दबाव बढ़ गया है, जहां अमेरिका के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान का कहना है कि वह सीधे तौर पर पड़ोसी देशों को निशाना नहीं बनाना चाहता, लेकिन यदि उनकी सुविधाओं का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जाता है तो स्थिति अलग हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह चेतावनी क्षेत्रीय देशों को संदेश देने की रणनीति का हिस्सा है। तेहरान चाहता है कि आसपास के देश अमेरिका के सैन्य अभियानों से दूरी बनाए रखें, ताकि संघर्ष का दायरा और न बढ़े।

वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी

अमेरिका-ईरान तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। सैन्य टकराव बढ़ने की स्थिति में तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील की है।

फिलहाल ईरान की चेतावनी के बाद क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो पश्चिम एशिया में बड़ा सैन्य संकट खड़ा हो सकता है।

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