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US vs Iran Tension: शांति वार्ता के बीच अमेरिका का बड़ा एक्शन, ईरानी जहाज रोका- आखिर क्या चाहते हैं Donald Trump?

US vs Iran Tension: शांति वार्ता के बीच अमेरिका का बड़ा एक्शन, ईरानी जहाज रोका- आखिर क्या चाहते हैं Donald Trump?

एक तरफ जहाँ इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की तैयारियाँ चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका ने एक और ईरानी जहाज़ को बीच रास्ते में ही रोक लिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Rafael (DDG 115) ने 24 अप्रैल को ईरान का झंडा लगे एक जहाज़ को रोका। यह जहाज़ ईरान के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकी नाकाबंदी के तहत इसे बीच रास्ते में ही रोक दिया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं, और हालात लगभग युद्ध जैसे बने हुए हैं।

इसका कारण क्या है?
दरअसल, अमेरिका ने 13 अप्रैल से ही ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर रखी है। इसका मकसद ईरान के तेल निर्यात और व्यापार को रोकना है। इस नाकाबंदी के तहत, कई जहाज़ों को या तो रोक लिया गया है या उन्हें वापस लौटने पर मजबूर किया गया है। इस टकराव का सबसे गहरा असर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ा है—जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया भर के तेल और गैस की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुज़रता है। हालाँकि, मौजूदा हालात को देखते हुए, इस जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऊर्जा संकट और भी गहरा गया है।

क्या शांति वार्ता सफल होगी?
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में इस मार्ग से समुद्री आवाजाही में भारी कमी आई है, जिसके चलते तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और विभिन्न देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच, कूटनीतिक गतिविधियाँ भी तेज़ हो गई हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर की तैयारियाँ चल रही हैं। हालाँकि, ईरान ने यह साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी अधिकारियों के साथ सीधे बातचीत नहीं करेगा, बल्कि पाकिस्तान के ज़रिए अपना पक्ष रखेगा। विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची के नेतृत्व में एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही इस्लामाबाद पहुँच चुका है। जहाँ एक तरफ अमेरिकी प्रतिनिधि भी बातचीत के लिए तैयार हैं, वहीं दूसरी तरफ, दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास को देखते हुए, इस बात पर गंभीर संदेह बना हुआ है कि इन वार्ताओं का कोई सफल परिणाम निकल पाएगा या नहीं।

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