अमेरिका में अनोखा मामला: दो बार जहर देने के बाद भी चलती रही सांसें, महिला की मौत की सजा रुकी
अमेरिका के टेनेसी राज्य में मौत की सजा पाए एक महिला कैदी को घातक इंजेक्शन देने के दौरान ऐसा मामला सामने आया, जिसने जेल प्रशासन और अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। क्रिस्टा गेल पाइक को मौत की सजा के तहत दो इंजेक्शन दिए गए, लेकिन इसके बाद भी उनकी मौत नहीं हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी खुराक दिए जाने के बाद भी उनकी धड़कन चलती रही और वह सोती हुई नजर आईं।पाइक को 1995 में 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। इसके एक साल बाद यानी 1996 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी।
मौत का इंजेक्शन देने के दौरान क्या हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, पाइक को बुधवार शाम मौत की सजा देने की प्रक्रिया शुरू की गई।
- शाम 7:27 बजे: पाइक को स्ट्रेचर पर बांधा गया और पहला इंजेक्शन दिया गया। उस समय वह होश में थीं।
- रात 8:26 बजे: उन्हें पेंटोबार्बिटल का दूसरा इंजेक्शन दिया गया। इस दौरान वह सो रही थीं।
- रात 8:53 बजे: उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और गवाहों को कमरे से बाहर जाने के लिए कहा गया।
- इसके बाद पाइक के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में इमरजेंसी याचिका दाखिल कर प्रक्रिया रोकने की मांग की।
वकीलों के मुताबिक, दोनों इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद पाइक की मौत नहीं हुई।
घातक इंजेक्शन के बाद जिंदा रहने का मामला
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में इससे पहले भी कुछ मामलों में मौत की सजा के दौरान इंजेक्शन देने की प्रक्रिया असफल रही है। हालांकि, उन मामलों में समस्या मुख्य रूप से नस में दवा पहुंचाने से जुड़ी बताई गई थी।
पाइक के मामले में दावा किया गया कि घातक दवा शरीर में पहुंचने के बाद भी उनकी मौत नहीं हुई। यही वजह है कि इस घटना को असामान्य माना जा रहा है।
टेनेसी के नियमों के मुताबिक, अगर पहली खुराक के बाद कैदी की मौत नहीं होती तो दूसरी खुराक दी जा सकती है। हालांकि, दो इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी कैदी के जीवित रहने की स्थिति में आगे की प्रक्रिया को लेकर नियमों में स्पष्टता का सवाल उठ रहा है।
1995 में हुई थी 19 साल की सहपाठी की हत्या
क्रिस्टा गेल पाइक को जनवरी 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या का दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पाइक, उनके तत्कालीन बॉयफ्रेंड तादारिल शिप और एक अन्य दोस्त ने स्लेमर को टेनेसी यूनिवर्सिटी के कैंपस के पास एक जंगल में बुलाया था।
अदालत में पेश किए गए मामले के मुताबिक, वहां स्लेमर के साथ मारपीट की गई और धारदार हथियार से हमला किया गया। अपराध के समय पाइक की उम्र 18 साल थी, जबकि शिप 17 साल के थे।शिप ने बाद में मामले में गवाही दी। नाबालिग होने के कारण उसे मौत की सजा नहीं दी गई और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
टेनेसी में महिला को मौत की सजा का मामला
पाइक लंबे समय से टेनेसी की डेथ रो में थीं। उनके मामले में मौत की सजा को लेकर कई कानूनी प्रक्रियाएं चलीं।जेल में रहने के दौरान पाइक ने अपने अपराध पर पछतावा जताया था। उनके वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि बचपन में उनके साथ हुई घटनाओं और मानसिक परेशानियों का उनके व्यवहार पर प्रभाव पड़ा था।दूसरी ओर, पीड़िता कोलीन स्लेमर के परिवार ने पाइक को दी गई मौत की सजा का समर्थन किया था। परिवार की ओर से कहा गया था कि पाइक ने जो किया उसकी जिम्मेदारी उन्हें उठानी चाहिए।
गवर्नर ने जांच के आदेश दिए, बाकी फांसी पर रोक
इस घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर ने मौत की सजा देने की प्रक्रिया में आखिर क्या हुआ, इसकी जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, इस साल राज्य में होने वाली बाकी मौत की सजाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।पाइक के वकीलों ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में कहा कि उन्हें पेंटोबार्बिटल के दो इंजेक्शन दिए गए, लेकिन इसके बावजूद उनकी मौत नहीं हुई।वहीं, टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने कहा कि अधिकारियों ने अदालत द्वारा मंजूर मौत की सजा की प्रक्रिया के हर चरण का पालन किया था। विभाग के मुताबिक, इसके बावजूद प्रक्रिया अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही।

