ईरान पर ट्रंप का कड़ा बयान: “या तो समझौता करेगा या तबाह होगा”, फुटेज में जानें चीन यात्रा से पहले बढ़ा तनाव, जंग पर अरबों डॉलर खर्च का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर बेहद सख्त बयान दिया है। चीन रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में अमेरिका “हर हाल में जीत हासिल करेगा।” उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
“समझौता करो या तबाह हो जाओ” – ट्रंप का बयान
ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के पास केवल दो विकल्प हैं—या तो वह समझौता करे या फिर पूरी तरह तबाह होने के लिए तैयार रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका के पास हालात को नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी विकल्प मौजूद हैं और वह किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम है। उनके इस बयान को अमेरिका की ईरान नीति में एक और आक्रामक रुख के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।
चीन यात्रा में ईरान और होर्मुज संकट पर चर्चा संभव
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि उनकी आगामी चीन यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते संकट पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इस बैठक का मुख्य फोकस व्यापारिक मुद्दे होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस संघर्ष पर चर्चा करती हैं, तो इसका वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
74 दिनों में 29 अरब डॉलर का सैन्य खर्च
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पिछले 74 दिनों के संघर्ष में अब तक करीब 29 अरब डॉलर का खर्च किया है। यह राशि मुख्य रूप से हथियारों, सैन्य उपकरणों और ऑपरेशंस पर खर्च हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह आंकड़ा केवल प्रत्यक्ष सैन्य खर्च का है, जबकि सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान और अन्य अप्रत्यक्ष खर्च इसमें शामिल नहीं हैं। अगर इन्हें जोड़ा जाए तो कुल खर्च और अधिक बढ़ सकता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री की अतिरिक्त बजट मांग
इसी बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ कांग्रेस पहुंचे और उन्होंने अतिरिक्त रक्षा बजट की मांग रखी है। माना जा रहा है कि यह बजट मौजूदा सैन्य अभियानों और भविष्य की तैयारियों को देखते हुए मांगा गया है।
वैश्विक तनाव में बढ़ोतरी की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान और अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है। इसके साथ ही तेल आपूर्ति, वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।

