ट्रम्प का ईरान पर बड़ा बयान: परमाणु हथियारों को लेकर कड़ी चेतावनी, वीडियो में जाने विरोध प्रदर्शनों और अर्थव्यवस्था पर भी किए तीखे दावे
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बयान दिया है कि Iran को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ट्रम्प ने अपने हालिया बयान में दावा किया कि उनके कार्यकाल में लिए गए कदमों के चलते ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को काफी हद तक कमजोर किया गया है।ट्रम्प ने कहा कि यदि लोग उनके इस दृष्टिकोण से सहमत हैं, तो यह स्पष्ट है कि उनकी नीतियाँ सफल रहीं, क्योंकि अमेरिकी सेना ने ईरान की क्षमताओं को “पूरी तरह कमजोर” कर दिया था। उन्होंने अपने बयान में यह भी दावा किया कि ईरान की सरकार एक “उग्रवादी” व्यवस्था है और उसकी नीतियाँ क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बनती हैं।
अपने संबोधन में ट्रम्प ने यह आरोप भी लगाया कि ईरान में सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 42,000 निहत्थे और बेगुनाह लोगों की हत्या की है। हालांकि, इस आंकड़े को लेकर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, और यह दावा राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।ट्रम्प ने आगे कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और उसकी स्थिति “चौपट” हो चुकी है। उनके अनुसार, अमेरिकी प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के चलते ईरान की आर्थिक व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे उसकी वैश्विक स्थिति कमजोर हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प का यह बयान आगामी अमेरिकी राजनीतिक माहौल और अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर चर्चा को फिर से तेज कर सकता है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता लंबे समय से बनी हुई है, और इस मुद्दे पर कई दौर की कूटनीतिक वार्ताएँ भी हो चुकी हैं।दूसरी ओर, ईरान की सरकार हमेशा से यह दावा करती रही है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और इसका सैन्य उपयोग नहीं किया जाएगा। हालांकि, पश्चिमी देशों और अमेरिका के साथ तनाव समय-समय पर बढ़ता रहा है।
ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर ईरान नीति को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। उनके दावों और आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ आने वाले दिनों में स्थिति को और स्पष्ट कर सकती हैं। फिलहाल, ट्रम्प का यह बयान न केवल कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और मध्य पूर्व की राजनीति पर भी इसके प्रभाव को लेकर निगाहें टिकी हुई हैं।

