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अमेरिका-ईरान समझौते पर ट्रंप प्रशासन की रणनीति, वीडियो में देंखे इजराइल की चिंता के बीच वेंस का बड़ा बयान

अमेरिका-ईरान समझौते पर ट्रंप प्रशासन की रणनीति, वीडियो में देंखे इजराइल की चिंता के बीच वेंस का बड़ा बयान

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई नया समझौता होता है, तो यह अमेरिकी जनता के लिए “बड़ी जीत” होगी, चाहे इजराइल को यह पसंद आए या नहीं। वेंस के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, क्योंकि इसमें अमेरिका के अपने हितों को प्राथमिकता देने की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

फॉक्स न्यूज को दिए गए इंटरव्यू में जेडी वेंस ने साफ कहा कि अमेरिका की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और इजराइल के बीच संबंध बेहद मजबूत हैं और दोनों देश कई मुद्दों पर एक साथ काम करते हैं, लेकिन हर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर दोनों की राय समान नहीं होती। वेंस के अनुसार, ईरान के साथ संभावित समझौते में अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित न कर सके।

वेंस ने दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में जो नया समझौता तैयार किया जा रहा है, वह 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुए परमाणु समझौते से कहीं अधिक सख्त और प्रभावी होगा। उन्होंने संकेत दिया कि पिछला समझौता कई स्तरों पर कमजोर था और उसमें ऐसी खामियां थीं, जिनका लाभ ईरान ने उठाया।

उनके इस बयान के बाद अमेरिका की मध्य पूर्व नीति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ईरान के साथ कोई नया समझौता करता है, तो इसका सीधा असर इजराइल की सुरक्षा रणनीति पर पड़ सकता है। इजराइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है और वह किसी भी तरह की ढील का विरोध करता रहा है।

वहीं, अमेरिकी प्रशासन का यह रुख संकेत देता है कि वाशिंगटन अब अपने कूटनीतिक फैसलों में अधिक स्वतंत्र और “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर आगे बढ़ रहा है। वेंस के बयान से यह भी स्पष्ट हुआ है कि ट्रंप प्रशासन इजराइल के साथ अपने मजबूत संबंधों के बावजूद, ईरान नीति में अलग दृष्टिकोण अपना सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान केवल एक कूटनीतिक संदेश नहीं है, बल्कि आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत भी हो सकता है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच नया समझौता होता है, तो यह न केवल क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक परमाणु नीति पर भी असर डाल सकता है।फिलहाल इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच यह कूटनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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