Samachar Nama
×

इटली में मेलोनी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग, 40 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन; पुलिस ने किया वॉटर कैनन का इस्तेमाल

इटली में मेलोनी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग, 40 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन; पुलिस ने किया वॉटर कैनन का इस्तेमाल

इटली में बढ़ती महंगाई, आसमान छूते किराये और शिक्षा पर कम सरकारी खर्च को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को देश के 40 से ज्यादा शहरों में हजारों छात्र, मजदूर और ट्रेड यूनियन के सदस्य प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने बेहतर वेतन, सस्ती आवास व्यवस्था, मजबूत सार्वजनिक सेवाओं और आम लोगों को महंगाई से राहत देने की मांग की। इस दौरान प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार की आर्थिक और सैन्य नीतियों पर भी सवाल उठाए गए।

देशभर में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सैन्य खर्च बढ़ाने और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में हथियार भेजने के लिए इटली के बंदरगाहों के इस्तेमाल का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब आम नागरिक महंगाई, महंगे मकानों और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तब सरकार को जनता की बुनियादी जरूरतों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

40 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन, मजदूरों और छात्रों ने उठाई आवाज

इटली में हुए ये प्रदर्शन केवल किसी एक शहर या वर्ग तक सीमित नहीं रहे। इनमें छात्रों, श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में रैलियां निकालीं और सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई।

प्रदर्शन में शामिल लोगों की प्रमुख मांगों में बेहतर वेतन, कामकाजी परिस्थितियों में सुधार, शिक्षा के लिए अधिक सरकारी सहायता और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करना शामिल था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने के साथ घर का किराया और अन्य जरूरी खर्च भी लोगों पर दबाव डाल रहे हैं।

छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक संस्थानों पर पर्याप्त खर्च किए जाने की मांग उठाई। वहीं, मजदूरों और कर्मचारियों ने वेतन में सुधार तथा जीवनयापन की बढ़ती लागत के मुकाबले बेहतर आर्थिक सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया।

24 घंटे की हड़ताल से जुड़ा था आंदोलन

यह देशव्यापी विरोध प्रदर्शन ट्रेड यूनियन संगठन यूनिओन सिंडाकेल डि बेस (USB) की ओर से बुलाई गई 24 घंटे की हड़ताल का हिस्सा था। इस हड़ताल के जरिए श्रमिकों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने की कोशिश की।

हड़ताल और प्रदर्शनों का उद्देश्य बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, वेतन में सुधार और सार्वजनिक सेवाओं के लिए अधिक संसाधनों की मांग को प्रमुखता से सामने लाना था। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि सरकार आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए।

देश के कई हिस्सों में रैलियों और विरोध कार्यक्रमों के कारण सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ जुटी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ज्यादातर जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी।

मेलोनी सरकार की सैन्य नीति का भी विरोध

प्रदर्शनकारियों की नाराजगी केवल महंगाई और शिक्षा तक सीमित नहीं थी। उन्होंने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार की सैन्य खर्च बढ़ाने की नीति का भी विरोध किया।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब देश के नागरिक महंगे किराये, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तब सैन्य खर्च बढ़ाने को कितनी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और श्रमिकों की आर्थिक स्थिति सुधारने जैसे मुद्दों पर भी पर्याप्त ध्यान देना चाहिए।

इसके अलावा, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में हथियार भेजने के लिए बंदरगाहों के इस्तेमाल को लेकर भी विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने सैन्य गतिविधियों में इटली की भूमिका पर आपत्ति जताते हुए युद्ध और हथियारों की आपूर्ति से दूरी बनाने की मांग की।

यह मुद्दा आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने घरेलू आर्थिक समस्याओं और सरकार की सैन्य प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

कुछ शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव

इटली के अधिकांश हिस्सों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने की खबरें सामने आईं, लेकिन कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की आशंका के बीच कई जगहों पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

इटली की समाचार एजेंसी एएनएसए के मुताबिक, संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के दौरान आठ लोगों को हिरासत में लिया गया। हालांकि, इन हिरासतों से संबंधित विस्तृत जानकारी और सभी घटनाओं की परिस्थितियों के बारे में उपलब्ध विवरण सीमित हैं।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई ने आंदोलन के तनावपूर्ण पहलू को सामने ला दिया। वहीं, देश के अन्य हिस्सों में लोगों ने अपनी मांगों को रैलियों और विरोध सभाओं के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से उठाया।

महंगाई और महंगे किराये बने लोगों की बड़ी चिंता

इटली में हुए इन प्रदर्शनों के केंद्र में आम लोगों की आर्थिक परेशानियां रहीं। महंगाई बढ़ने से परिवारों की खरीदारी क्षमता प्रभावित होती है, जबकि बड़े शहरों में महंगे किराये छात्रों और कम आय वाले कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकते हैं।

छात्रों के लिए आवास और शिक्षा का खर्च उच्च शिक्षा हासिल करने में बाधा बन सकता है। दूसरी ओर, मजदूरों और कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार आर्थिक नीतियां बनाते समय आम लोगों की जरूरतों और उनकी क्रय शक्ति को प्राथमिकता दे।

सार्वजनिक सुविधाओं पर खर्च बढ़ाने की मांग भी इसी चिंता से जुड़ी रही। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि शिक्षा और अन्य बुनियादी सेवाओं में पर्याप्त निवेश से आम नागरिकों को राहत मिल सकती है और आर्थिक असमानताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार के सामने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां

40 से ज्यादा शहरों में हुए प्रदर्शनों ने इटली में आर्थिक नीतियों, सार्वजनिक खर्च और सैन्य प्राथमिकताओं को लेकर जारी असंतोष को सामने ला दिया। छात्रों और श्रमिकों की भागीदारी से यह भी स्पष्ट हुआ कि आंदोलन में शिक्षा, रोजगार, वेतन और रहने की लागत जैसे कई मुद्दे एक साथ उठाए गए।

हालांकि, इन प्रदर्शनों के बाद मेलोनी सरकार की ओर से किसी विशेष मांग को स्वीकार किए जाने या नीति में बदलाव की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि आंदोलन का सरकार के फैसलों पर तत्काल क्या असर पड़ेगा।

फिलहाल, इटली में हुए ये प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि महंगाई, आवास की लागत, सार्वजनिक सेवाओं और सैन्य खर्च जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और ट्रेड यूनियनों की आगे की रणनीति पर नजर रहेगी।

Share this story

Tags