ईरान युद्ध में अमेरिका अकेला पड़ा, वीडियो में देखें यूरोप ने होर्मुज का रास्ता खुलवाने में ट्रंप का साथ देने से किया इनकार
ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने वैश्विक सहयोग की अपील की थी, लेकिन यूरोप के प्रमुख देशों ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में सैन्य मदद देने से साफ इनकार कर दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने कई देशों से अपील की थी कि वे फारस की खाड़ी के अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को सुरक्षित बनाने के लिए युद्धपोत भेजें। यह मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, यूरोप के प्रमुख देशों—जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन—ने इस मांग को ठुकरा दिया। इन देशों का स्पष्ट कहना है कि यह “उनकी लड़ाई नहीं” है और वे किसी बड़े युद्ध में शामिल होने का जोखिम नहीं उठाना चाहते। फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी साफ कहा कि मौजूदा हालात में उनका देश किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा और केवल कूटनीतिक समाधान पर जोर देगा।
क्यों अहम है हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है। यहां से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद इस क्षेत्र में हमले, ड्रोन स्ट्राइक और माइन बिछाने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।
यूरोप ने क्यों किया इनकार?
यूरोपीय देशों का मानना है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने बिना व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति के इस युद्ध को शुरू किया। ऐसे में वे इसमें शामिल होकर खुद को खतरे में नहीं डालना चाहते।
जर्मनी ने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लेगा, जबकि ब्रिटेन ने भी कहा कि वह युद्ध को बढ़ाने के बजाय कूटनीति का रास्ता अपनाएगा।
ट्रंप का जवाब:
यूरोपीय देशों के इनकार के बाद ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने दम पर हॉर्मुज़ को सुरक्षित कर सकता है।
बढ़ता वैश्विक तनाव:
ईरान और अमेरिका के बीच यह टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे तेल की कीमतों में भी उछाल आया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

