दुनिया पर मंडरा रहा ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ का खतरा, वीडियो में जाने 4.5 लाख अतिरिक्त मौतों की आशंका; बढ़ेगी गर्मी और बाढ़
दुनिया के सामने एक बड़े जलवायु संकट का खतरा मंडराने की आशंका जताई जा रही है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस अधिक पहुंचने के दावे के बीच बेहद शक्तिशाली अल नीनो को लेकर चिंता बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञ इसे ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ कह रहे हैं। इसके प्रभाव से दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा और भारी बारिश जैसी चरम मौसमी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच इस जलवायु घटना के प्रभावों से दुनियाभर में करीब 4.5 लाख अतिरिक्त मौतें होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, यह एक अनुमान है और वास्तविक प्रभाव मौसम की परिस्थितियों, लोगों की संवेदनशीलता तथा बचाव के इंतजामों पर निर्भर करेगा।
क्या है सुपर अल नीनो?
अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि से जुड़ी जलवायु घटना है। इसके कारण वायुमंडलीय परिसंचरण और हवाओं के पैटर्न में बदलाव होता है, जिसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के मौसम पर पड़ सकता है।जब समुद्र का तापमान सामान्य से काफी अधिक बढ़ जाता है और इसके साथ वायुमंडल में भी व्यापक बदलाव होते हैं, तो अल नीनो का प्रभाव अधिक तीव्र हो सकता है। हालांकि, ‘सुपर अल नीनो’ या ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ आम तौर पर अत्यधिक मजबूत परिस्थितियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अनौपचारिक शब्द हैं।
दिसंबर में चरम पर पहुंचने की आशंका
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस साल का अल नीनो दिसंबर 2026 के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज होने की आशंका है।अल नीनो के कारण कुछ क्षेत्रों में बारिश कम हो सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में अत्यधिक वर्षा की परिस्थितियां बन सकती हैं। इसका असर खेती, जल उपलब्धता, बिजली की मांग और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
WMO ने सूखे और बाढ़ के खतरे को लेकर किया आगाह
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, अल नीनो के दौरान वर्षा के सामान्य पैटर्न में बदलाव हो सकता है। इससे कुछ क्षेत्रों में सूखे का खतरा बढ़ सकता है, जबकि अन्य जगहों पर भारी बारिश और बाढ़ की आशंका पैदा हो सकती है।दी गई जानकारी के अनुसार, इस घटना का प्रभाव उत्तरी गोलार्ध में 2027 के वसंत तक बना रह सकता है। फरवरी 2027 तक इसके जारी रहने की संभावना को लेकर भी बड़ा अनुमान सामने आया है। हालांकि, इतनी लंबी अवधि के पूर्वानुमान में बदलाव संभव है और वास्तविक स्थिति की पुष्टि नियमित मौसम निगरानी से ही होगी।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
अल नीनो का भारत पर असर विशेष रूप से मानसून और तापमान के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से अल नीनो की कुछ घटनाएं भारत में कमजोर मानसून से जुड़ी रही हैं, लेकिन हर बार इसका असर एक जैसा नहीं होता।यदि इस बार भी समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बड़े बदलाव होते हैं, तो देश के कुछ हिस्सों में बारिश के वितरण, गर्मी और कृषि संबंधी परिस्थितियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत में मानसून कैसा रहेगा, इसका आकलन केवल अल नीनो के आधार पर नहीं किया जा सकता।
जलवायु और स्वास्थ्य के लिए क्यों अहम है यह घटना?
अत्यधिक गर्मी से बुजुर्गों, बच्चों, बाहर काम करने वाले लोगों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को अधिक खतरा हो सकता है। लंबे समय तक सूखा रहने से पेयजल और कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं, जबकि भारी बारिश से बाढ़ और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ता है।इसी वजह से मौसम विशेषज्ञ अल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रखने और समय रहते तैयारी करने पर जोर देते हैं। फिलहाल, इसकी वास्तविक तीव्रता, अवधि और अलग-अलग देशों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर आधिकारिक मौसम अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।

