ग्लेशियर टूटने के 38 मिनट बाद जारी हुआ अलर्ट, वीडियो में लोगों ने कहा- चेतावनी से ज्यादा किस्मत ने बचाया
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्लेशियर टूटने के करीब 38 मिनट बाद बाढ़ की चेतावनी जारी की गई, लेकिन तब तक कई लोगों के पास सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं बचा था।बाढ़ से बचने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें समय पर पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई। कई लोगों ने बताया कि वे किसी चेतावनी की वजह से नहीं, बल्कि अपनी किस्मत और अचानक लिए गए फैसलों के कारण बच पाए।
अलर्ट मिलने तक बिगड़ चुके थे हालात
नेपाल के प्रभावित इलाकों के लोगों ने बताया कि जब तक उन्हें बाढ़ का अलर्ट मिला, तब तक पानी तेजी से बढ़ चुका था। अचानक आई बाढ़ ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।कई परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। कुछ लोगों ने ऊंचे स्थानों पर पहुंचकर अपनी जान बचाई, जबकि कई लोग इस आपदा की चपेट में आ गए।
लंबे समय से मौजूद था खतरा
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लेशियर टूटने और अचानक बाढ़ आने का खतरा क्षेत्र में लंबे समय से मौजूद था। विशेषज्ञों ने पहले भी हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर पिघलने और उससे पैदा होने वाले खतरे को लेकर चिंता जताई थी।इसके बावजूद इस जोखिम की लगातार निगरानी और प्रभावी तैयारी नहीं की गई। यही वजह रही कि आपदा आने के बाद राहत और बचाव कार्यों में मुश्किलें सामने आईं।
बेहतर निगरानी और चेतावनी प्रणाली की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों और संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। आधुनिक तकनीक और मजबूत चेतावनी प्रणाली से ऐसी आपदाओं में जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।समय पर जारी किया गया अलर्ट लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का मौका दे सकता है। लेकिन नेपाल की इस घटना ने आपदा प्रबंधन व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रभावित इलाकों में जारी है राहत कार्य
बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। वहीं, प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है।नेपाल की यह त्रासदी एक बार फिर बताती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को देखते हुए पहले से तैयारी और मजबूत चेतावनी तंत्र कितना जरूरी है।

